कथा में बताया गया है कि स्नान और नित्य कर्मों के बाद श्रद्धालु को फूल, माला, चंदन और पूजन सामग्री लेकर भगवान विष्णु अथवा शिवजी के मंदिर जाना चाहिए। वहां विधिपूर्वक पूजा-अर्चना, अर्घ्य, आचमन, प्रणाम और परिक्रमा करनी चाहिए। इसके साथ ही भजन, कीर्तन, संगीत और नृत्य के माध्यम से भगवान का गुणगान करना भी कार्तिक मास की उपासना का महत्वपूर्ण अंग बताया गया है।