# श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर बोहन में कार्तिक महात्म्य व्रत कथा का तीसरा अध्याय: जानिए क्यों भगवान श्रीकृष्ण को प्रिय है कार्तिक मास
**ज्वालामुखी।** श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर, देहरा रोड, बोहन, ज्वालामुखी में कार्तिक मास के पावन अवसर पर कार्तिक महात्म्य व्रत कथा का पाठ जारी है। कार्तिक महात्म्य के तीसरे अध्याय में माता सत्यभामा भगवान श्रीकृष्ण से प्रश्न करती हैं कि सभी महीनों में कार्तिक मास को श्रेष्ठ और उन्हें सबसे अधिक प्रिय क्यों माना जाता है। भगवान श्रीकृष्ण इस प्रश्न के उत्तर में नारद मुनि और राजा पृथु के संवाद के माध्यम से कार्तिक मास की महिमा का वर्णन करते हैं।
## कार्तिक मास की श्रेष्ठता का रहस्य
माता सत्यभामा भगवान श्रीकृष्ण से पूछती हैं कि जब वर्ष, मास और तिथि सहित काल के सभी अंग समान रूप से महत्व रखते हैं, तो फिर कार्तिक मास को विशेष स्थान क्यों प्राप्त है? इसी प्रकार एकादशी तिथि भगवान को इतनी प्रिय क्यों है?
भगवान श्रीकृष्ण माता सत्यभामा को बताते हैं कि इस विषय में वे नारद मुनि और राजा पृथु के बीच हुए संवाद का वर्णन करेंगे। नारद मुनि ने राजा पृथु को कार्तिक मास की महिमा सुनाते हुए शंखासुर नामक शक्तिशाली असुर की कथा बताई थी।
## शंखासुर ने देवताओं से छीने अधिकार
नारद मुनि के अनुसार, प्राचीन काल में शंखासुर नामक एक शक्तिशाली असुर ने देवताओं को पराजित कर उनके अधिकार छीन लिए थे। भयभीत देवता अपने परिवारों सहित सुमेरु पर्वत की गुफाओं में छिप गए। शंखासुर ने विचार किया कि देवताओं की शक्ति का प्रमुख आधार वेद और वेदमंत्र हैं। यदि वेदों को उनसे छीन लिया जाए, तो देवता और भी निर्बल हो जाएंगे।
इसी उद्देश्य से शंखासुर ने भगवान विष्णु के योगनिद्रा में रहने के दौरान वेदों को चुरा लिया। वेदमंत्र और यज्ञ से संबंधित तत्व भयवश जल में छिप गए। असुर ने समुद्र में उनकी खोज की, लेकिन उन्हें प्राप्त नहीं कर सका।
## भगवान विष्णु ने देवताओं को दिया वरदान
उधर, ब्रह्माजी अन्य देवताओं के साथ भगवान विष्णु की शरण में पहुंचे। देवताओं ने भजन-कीर्तन, मंगलगान, धूप और सुगंधित सामग्री से भगवान की आराधना की। उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु जाग उठे और देवताओं को वरदान मांगने के लिए कहा।
भगवान विष्णु ने कहा कि कार्तिक शुक्ल पक्ष की एकादशी तक प्रातःकाल भजन-कीर्तन और मंगलगान करने वाले भक्त उन्हें अत्यंत प्रिय होंगे। ऐसे भक्त देह त्यागने के बाद वैकुंठ धाम को प्राप्त करेंगे।
भगवान ने शंखासुर का वध करके वेदों को वापस लाने का संकल्प भी लिया। उन्होंने बताया कि कार्तिक मास में प्रातःकाल स्नान करने वाले श्रद्धालुओं को महान पुण्य प्राप्त होगा। इस मास में स्नान और व्रत करने वाले भक्तों पर देवताओं की विशेष कृपा बनी रहेगी।
## कार्तिक स्नान, व्रत और भक्ति का महत्व
भगवान श्रीकृष्ण के वर्णन के अनुसार, कार्तिक मास में नियमित रूप से स्नान, व्रत, पूजन, भजन और कीर्तन करने का विशेष महत्व है। इस दौरान श्रद्धा और विधिपूर्वक पूजा करने वाले भक्तों को भगवान का सान्निध्य प्राप्त होता है। भगवान इंद्र, वरुण और कुबेर को भी ऐसे भक्तों की रक्षा करने तथा उनके कल्याण में सहयोग देने का निर्देश देते हैं।
भगवान विष्णु बताते हैं कि देवताओं ने कार्तिक शुक्ल एकादशी के दिन उनकी स्तुति और आराधना करके उन्हें योगनिद्रा से जगाया था। इसी कारण यह एकादशी उन्हें अत्यंत प्रिय है।
कार्तिक महात्म्य का यह अध्याय श्रद्धालुओं को संदेश देता है कि कार्तिक मास में भगवान की आराधना, प्रातःकाल स्नान, व्रत, दान और हरिनाम संकीर्तन के माध्यम से आध्यात्मिक जीवन को समृद्ध बनाने का प्रयास करना चाहिए। श्रद्धा, संयम और भक्ति इस पावन मास की प्रमुख विशेषताएं हैं।
**श्री हरिः शरणम्। श्री लक्ष्मी नारायणाय नमः।**