# बगलामुखी मंदिर के सरकारी अधिग्रहण की मांग ने फिर पकड़ा जोर, अनुराग ठाकुर भी पहले उठा चुके हैं मुद्दा
**धर्मशाला:** कांगड़ा जिले के बनखंडी स्थित प्रसिद्ध श्री बगलामुखी मंदिर को हिमाचल प्रदेश सरकार के अधीन लाने की मांग लंबे समय से राजनीतिक और प्रशासनिक चर्चा का विषय रही है। फरवरी 2020 में केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर और हिमाचल प्रदेश के पूर्व मंत्री रविंद्र रवि ने भी मंदिर के सरकारी अधिग्रहण की मांग उठाई थी। इस मुद्दे के केंद्र में मंदिर प्रबंधन, वित्तीय पारदर्शिता और सरकारी नियंत्रण की व्यवस्था रही है।
## अनुराग ठाकुर ने पहले भी उठाई थी मांग
19 फरवरी 2020 को देहरा में तत्कालीन मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर की मौजूदगी में आयोजित एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान अनुराग ठाकुर ने मंदिर प्रबंधन और उसे वित्तीय सहायता देने के प्रस्ताव पर सवाल उठाए थे। *द ट्रिब्यून* की 20 फरवरी 2020 की रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने एशियाई विकास बैंक से मंदिर के लिए प्रस्तावित लगभग 3.5 करोड़ रुपये की सहायता का उल्लेख करते हुए तर्क दिया था कि मंदिर को पहले सरकारी नियंत्रण में लाया जाना चाहिए।
इस दौरान पूर्व मंत्री रविंद्र रवि ने भी मंदिर के सरकारी अधिग्रहण की मांग उठाई थी। इसके बाद मंदिर के प्रबंधन, वित्तीय व्यवस्था और विकास कार्यों को लेकर यह मुद्दा चर्चा में रहा।
## क्या कहता है हिमाचल प्रदेश का मंदिर अधिनियम?
हिमाचल प्रदेश में सार्वजनिक हिंदू धार्मिक संस्थानों और धर्मार्थ बंदोबस्त के प्रशासन के लिए **हिमाचल प्रदेश हिंदू सार्वजनिक धार्मिक संस्थान एवं धर्मार्थ बंदोबस्त अधिनियम, 1984** लागू है। इस अधिनियम के तहत इसके दायरे में आने वाले धार्मिक संस्थानों के प्रशासन, आय के उचित उपयोग और प्रबंधन से संबंधित प्रावधान किए गए हैं।
अधिनियम की धारा 5 के तहत इसके दायरे में आने वाले संस्थानों पर आयुक्त के सामान्य पर्यवेक्षण और नियंत्रण का प्रावधान है। वहीं, धारा 9 में न्यासियों की जिम्मेदारियों तथा संस्थान के मामलों और संपत्ति के प्रबंधन से संबंधित प्रावधान हैं।
हालांकि, यह अधिनियम अपने दायरे में आने वाले निर्धारित धार्मिक संस्थानों पर लागू होता है। इसलिए बगलामुखी मंदिर पर इसके प्रावधान किस सीमा तक लागू होते हैं, यह मंदिर की कानूनी स्थिति, अधिनियम की अनुसूची, संबंधित अधिसूचनाओं और सरकारी अभिलेखों की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकता है।
## वर्ष 2020 में प्रशासनिक जांच भी रही चर्चा में
नवंबर 2020 में *अमर उजाला* की एक रिपोर्ट के अनुसार, मंदिर से संबंधित प्रशासनिक जांच के बाद कांगड़ा के उपायुक्त ने मंदिर का सरकारी अधिग्रहण करने और न्यास समिति में प्रशासनिक अधिकारियों को शामिल करने की सिफारिश की थी। यह एक प्रशासनिक सिफारिश थी; इससे अपने आप यह साबित नहीं होता कि मंदिर का अधिग्रहण वास्तव में हो गया था।
## सरकार के रुख पर टिकी निगाहें
बगलामुखी मंदिर के सरकारी अधिग्रहण की मांग के संदर्भ में अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि सरकार ने इस संबंध में आगे क्या कदम उठाए हैं और वर्तमान में मंदिर की प्रशासनिक एवं कानूनी स्थिति क्या है।
मंदिर का प्रबंधन, चढ़ावे और आय में पारदर्शिता, विकास कार्यों के लिए मिलने वाली धनराशि का उपयोग तथा श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध करवाना इस बहस के प्रमुख पहलू हैं। सरकार का आधिकारिक रुख, वर्तमान मंदिर प्रबंधन की प्रतिक्रिया और संबंधित दस्तावेज इस मामले की मौजूदा स्थिति स्पष्ट करने में महत्वपूर्ण होंगे।