क्या हम अनुष्ठान में दो-चार घण्टे के लिए बातचीत नहीं रोक सकते ? यदि नहीं रोक सकते,तो हम जीवन एवं धन का दुरुपयोग कर रहे हैं।
और भी दुर्दशा है,मैंने कई अनुष्ठानों में यह भी देखा है कि पाठकर्ता, जपकर्ता मुँह में खैनी,पान पराग, गुटखा,लौंग, इलायची आदि रख लेते हैं।यह अनुष्ठान की शुद्धता कैसे रही?