उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश में खेल प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है। आवश्यकता है कि स्थानीय स्तर पर खिलाड़ियों को बेहतर मैदान, प्रशिक्षक, प्रतियोगिताएं और निरंतर प्रोत्साहन मिले। विद्यालय, महाविद्यालय, विश्वविद्यालय और स्थानीय खेल क्लब मिलकर प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।