15 अगस्त 2026 पंचांग: शनिवार को श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि है। धार्मिक दृष्टि से यह दिन विशेष है, क्योंकि इसी दिन हरियाली तीज का पर्व मनाया जाएगा। भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा के लिए यह दिन विशेष माना जाता है। वहीं 15 अगस्त को देशभर में स्वतंत्रता दिवस भी मनाया जाएगा। आइए जानते हैं 15 अगस्त 2026 का संपूर्ण पंचांग और आज के दिन के शुभ-अशुभ समय।
कामिका एकादशी केवल एक व्रत नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, संयम, भक्ति और सेवा का पर्व है। श्रद्धापूर्वक भगवान विष्णु की आराधना करने से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की प्राप्ति होती है। यदि संभव हो तो इस दिन दान-पुण्य और जरूरतमंदों की सहायता अवश्य करें।
ज्येष्ठ पूर्णिमा को अत्यंत पवित्र माना जाता है। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान, भगवान विष्णु की पूजा तथा दान-पुण्य का विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पूर्णिमा पर चंद्रमा अपनी पूर्ण कलाओं से युक्त होता है, जिससे मानसिक शांति, सकारात्मक ऊर्जा और आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है।
भगवान विष्णु की कृपा पाने के लिए भक्त इस दिन उपवास रखते हैं और श्रीहरि का पूजन करते हैं। मान्यता है कि यह व्रत आर्थिक संकट, मानसिक तनाव और पारिवारिक कष्टों को दूर करने में सहायक होता है।
वैशाख पूर्णिमा के दिन भगवान विष्णु के द्वितीय अवतार 'कूर्म' की जयंती मनाई जाती है। समुद्र मंथन के समय जब मंदराचल पर्वत डूबने लगा था, तब श्रीहरि ने कछुए का रूप धारण कर उसे अपनी पीठ पर संभाला था। यह अवतार धैर्य और स्थिरता का प्रतीक है। कूर्म जयंती पर पूजन करने से जीवन में स्थिरता आती है और रुके हुए कार्य सिद्ध होते हैं।
16 अप्रैल 2026 का दिन मासिक शिवरात्रि के कारण विशेष आध्यात्मिक महत्व रखता है। पूरे दिन चतुर्दशी तिथि का प्रभाव रहने से शिव पूजा, व्रत और साधना का फल कई गुना बढ़ जाता है। सही मुहूर्त में विधिपूर्वक पूजा करने से जीवन में सुख-शांति और समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होता है।
वरुथिनी एकादशी व्रत भक्तों को सभी प्रकार की विपत्तियों से बचाते हैं। साथ ही महिलाओं अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होने का साथ साथ पारिवारिक जीवन में सुख शांति बनी रहती है। एकादशी तिथि का व्रत भगवान विष्णु को समर्पित व्रत है। शास्त्रों में एकादशी तिथि का यह नियम बताया गया है कि जब भी सूर्योदय के समय एकादशी तिथि लगी होती है तो उस दिन एकादशी तिथि का व्रत किया जाता है।
इस दिन विधि-विधान से पूजा करने पर जीवन में सफलता, ज्ञान और समृद्धि की प्राप्ति होती है। यह दिन नवरात्रि का समापन भी दर्शाता है।
पौराणिक मान्यता के अनुसार, कठोर तपस्या के कारण माँ का शरीर काला पड़ गया था, जिसे भगवान शिव ने गंगाजल से शुद्ध कर गौर वर्ण प्रदान किया। इसी कारण उन्हें महागौरी कहा जाता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, माँ कालरात्रि का रूप अत्यंत भयानक लेकिन भक्तों के लिए कल्याणकारी है। यही कारण है कि उन्हें ‘शुभंकरी’ भी कहा जाता है। वे अपने भक्तों को हर प्रकार के भय से मुक्त कर साहस और निर्भीकता प्रदान करती हैं।