नवरात्रि का छठा दिन: माँ कात्यायनी की पूजा से मिलती है शक्ति, साहस और विवाह में सफलता
नवरात्रि के छठे दिन माँ दुर्गा के छठे स्वरूप माँ कात्यायनी की पूजा-अर्चना की जाती है। यह दिन विशेष रूप से शक्ति, साहस और धर्म की रक्षा के लिए समर्पित माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, माँ कात्यायनी ने ही महिषासुर जैसे शक्तिशाली असुर का वध कर संसार को उसके अत्याचारों से मुक्त कराया था।
पौराणिक कथाओं के अनुसार, माँ कात्यायनी का जन्म महर्षि कात्यायन के कठोर तप से हुआ था। देवी के इस रूप को अत्यंत तेजस्वी और प्रभावशाली माना जाता है। उनका स्वरूप भक्तों के भीतर आत्मविश्वास और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है।
धार्मिक मान्यता है कि माँ कात्यायनी की सच्चे मन से पूजा करने पर विवाह में आ रही बाधाएं दूर होती हैं। यही कारण है कि इस दिन विशेष रूप से अविवाहित युवतियां देवी की आराधना कर योग्य जीवनसाथी की कामना करती हैं।
पूजा विधि (Puja Vidhi)
सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें
माँ कात्यायनी की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें
पीले या लाल फूल अर्पित करें
शहद (मधु) का भोग लगाएं
दीपक और धूप जलाकर आरती करें
कात्यायनी मंत्र का जाप करें
मंत्र (Mantra)
ॐ देवी कात्यायन्यै नमः॥
🌼 पूजा का महत्व
माँ कात्यायनी की पूजा से जीवन में साहस, आत्मविश्वास और सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है। साथ ही विवाह में आ रही बाधाएं दूर होती हैं और मनचाहा जीवनसाथी प्राप्त होने की मान्यता है। #Navratri2026 #MaaKatyayani #Navdurga #Dharamshala #Himachal #FestivalVibes #DatelineDharamshala