पौराणिक मान्यता के अनुसार, कठोर तपस्या के कारण माँ का शरीर काला पड़ गया था, जिसे भगवान शिव ने गंगाजल से शुद्ध कर गौर वर्ण प्रदान किया। इसी कारण उन्हें महागौरी कहा जाता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, माँ कालरात्रि का रूप अत्यंत भयानक लेकिन भक्तों के लिए कल्याणकारी है। यही कारण है कि उन्हें ‘शुभंकरी’ भी कहा जाता है। वे अपने भक्तों को हर प्रकार के भय से मुक्त कर साहस और निर्भीकता प्रदान करती हैं।
माँ कात्यायनी की पूजा से जीवन में साहस, आत्मविश्वास और सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है। साथ ही विवाह में आ रही बाधाएं दूर होती हैं और मनचाहा जीवनसाथी प्राप्त होने की मान्यता है।
चैत्र नवरात्रि के चौथे दिन मां दुर्गा के चौथे स्वरूप मां कूष्मांडा की पूजा की जाती है। इन्हें ‘आदिशक्ति’ और ‘अष्टभुजा देवी’ के नाम से भी जाना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि मां कूष्मांडा ने अपनी मंद मुस्कान से पूरे ब्रह्मांड की रचना की थी और इनका निवास सूर्यमंडल के भीतर माना जाता है।