श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड (SMVDSB) आज भारत के प्रमुख हिंदू तीर्थ स्थलों में से एक का बेहतरीन प्रबंधन करने वाला संस्थान माना जाता है। 1986 में गठित यह बोर्ड जम्मू-कश्मीर के कटड़ा स्थित त्रिकुटा पहाड़ियों पर स्थित माता वैष्णो देवी की पवित्र गुफा मंदिर की देखभाल करता है।
बोर्ड का गठन तब हुआ जब बारिदार प्रथा और पुरानी व्यवस्था में सुविधाओं की भारी कमी थी। तत्कालीन गवर्नर जगमोहन के प्रयासों से 1988 के एक्ट के तहत बोर्ड ने नियंत्रण संभाला और यात्रा को आधुनिक रूप दिया। बोर्ड की संरचना स्वायत्त है। गवर्नर पदेन चेयरमैन होते हैं। बोर्ड में प्रशासनिक अधिकारी, धार्मिक विशेषज्ञ और अन्य सदस्य शामिल होते हैं। सीईओ बोर्ड की नीतियों को लागू करता है। फंड्स को देवता की संपत्ति माना जाता है, जिसे सेकुलर कामों में नहीं लगाया जा सकता। यह मॉडल तिरुपति तिरुमाला देवस्थानम बोर्ड की तरह प्रोफेशनल मैनेजमेंट का उदाहरण है।
1986 में जहां सालाना यात्री संख्या मात्र 13-14 लाख थी, वहीं 2023 में यह 95.22 लाख पहुंच गई। 2024 में 94.83 लाख श्रद्धालु आए, जो दशक का दूसरा सबसे उच्च आंकड़ा था। 2025 में भी लाखों भक्त पहुंचे। चैत्र नवरात्रि 2026 में भी भारी भीड़ रही—एक दिन में 39,000 से ज्यादा यात्री पहुंचे और कुल 2.69 लाख से अधिक ने दर्शन किए।
बोर्ड समय-समय पर भीड़ को नियंत्रित करने के लिए यात्रा रजिस्ट्रेशन अस्थायी रूप से रोकता है, जैसा नए साल 2026 और नवरात्रि के दौरान हुआ।बोर्ड की सबसे बड़ी उपलब्धि तीर्थयात्रियों की सुविधाएं हैं। ऑनलाइन बुकिंग, आरएफआईडी कार्ड, हेलीकॉप्टर सेवा, बैटरी कार, आवास, लंगर, मेडिकल सुविधाएं और स्वच्छता व्यवस्था विश्वस्तरीय स्तर की है। हाल ही में स्मार्ट लॉकर, सम डे रिटर्न पैकेज, यात्री बीमा बढ़ाने और ग्रीन प्लान जैसी पहल शुरू की गईं। कटड़ा को आधुनिक बनाने के लिए शक्ति म्यूजियम, साउंड एंड लाइट शो और अन्य विकास कार्य चल रहे हैं।
बोर्ड स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा देता है—स्वयं सहायता समूहों से खरीदारी, महिलाओं और युवाओं को रोजगार।वित्तीय रूप से बोर्ड मजबूत है। 2023-24 में कुल आय 683 करोड़ रुपये रही, जिसमें चढ़ावा 255 करोड़, ब्याज 133 करोड़ और अन्य स्रोत शामिल थे। खर्च मुख्यतः विकास कार्यों, स्टाफ और संचालन पर होता है। बोर्ड मेडिकल कॉलेज, यूनिवर्सिटी और अन्य सामाजिक कार्यों को भी फंड देता है।
हालांकि चुनौतियां भी हैं। 2025 में अगस्त में लैंडस्लाइड में 34 लोगों की मौत के बाद यात्रा 22 दिन बंद रही, फिर सितंबर में बहाल हुई। बारिदार परिवारों की पुरानी मांगें और कभी-कभी राजनीतिक प्रभाव की शिकायतें उठती रहती हैं। फिर भी बोर्ड सुरक्षा, मौसम निगरानी और नई गाइडलाइंस (जैसे आरएफआईडी के 10 घंटे में यात्रा शुरू करना) से सुधार करता रहता है।
हिमाचल प्रदेश में सरकारी नियंत्रण वाले मंदिरों (जैसे ज्वालामुखी, चिंतपूर्णी) में बारिदार शेयर सिस्टम, फंड दुरुपयोग और पूजा-पाठ के माहौल बिगड़ने की शिकायतें आम हैं। हिमाचल हाईकोर्ट ने भी चढ़ावे को देवता की संपत्ति बताया है। ऐसे में भक्त वैष्णो देवी मॉडल की मांग कर रहे हैं—एक समर्पित श्राइन बोर्ड जिसमें पारदर्शिता, विकास और धार्मिक माहौल का संतुलन हो।
वैष्णो देवी बोर्ड ने साबित किया कि सही प्रबंधन से एक छोटा तीर्थ स्थल विश्वस्तरीय बन सकता है। लाखों भक्तों की श्रद्धा, आधुनिक सुविधाएं और मजबूत अर्थव्यवस्था इसका प्रमाण हैं। हिमाचल सरकार को भक्तों, पुजारियों और विशेषज्ञों से चर्चा कर इसी दिशा में कदम उठाने चाहिए। इससे न सिर्फ मंदिरों की व्यवस्था सुधरेगी, बल्कि पूजा-पाठ का पवित्र माहौल भी बना रहेगा। जय माता दी!