आज है आमलकी एकादशी: भगवान विष्णु की कृपा और आंवला पूजन का पावन पर्व
27 फरवरी 2026, शुक्रवार – धर्मशाला
भारतीय ज्योतिष शास्त्र में पंचांग का अपना महत्व है। पंचांग के अनुसार ही हम अपने धार्मिक क्रियाकलाप करते हैं। शुभ अशुभ का ज्ञान हमें प्राप्त होता है। आइये जानते हैं, आज के पंचांग के अनुसार कब है शुभ मुहूर्त और कब तक है राहुकाल और क्या है ग्रह चाल।
आज का दिन हिंदू कैलेंडर में अत्यंत पवित्र और महत्वपूर्ण है। फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि पर मनाई जाने वाली आमलकी एकादशी (Amalaki Ekadashi) आज 27 फरवरी 2026 को शुक्रवार को पड़ रही है। इसे रंगभरी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है, क्योंकि यह होली से ठीक पहले का उत्सव है और वाराणसी में रंगों से जुड़े रस्मों की शुरुआत का प्रतीक माना जाता है।
आज शुक्रवार है। शक संवत 1947 , विक्रमी संवत 2082, 27 फरवरी 2026 को फाल्गुन मास की शुक्ल एकादशी है, जिसे आमलकी एकादशी के रूप में मनाया जाता है।
तिथि: शुक्ल पक्ष एकादशी – रात 10:32-10:33 बजे तक
नक्षत्र: आर्द्रा (सुबह लगभग 10:48 AM तक), उसके बाद पुनर्वसु
योग: आयुष्मान (शाम लगभग 7:43 PM तक), उसके बाद सौभाग्य
करण: वणिज (सुबह तक), उसके बाद विष्टि
विक्रम संवत: 2082 कालयुक्त
शक संवत: 1947 विश्वावसु
सूर्योदय: लगभग 6:50-7:00 AM (धर्मशाला क्षेत्र में)
सूर्यास्त: लगभग 6:20-6:30 PM
अशुभ और शुभ समय (उत्तर भारत आधारित):
अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12 बजे के आसपास – पूजा-पाठ के लिए उत्तम।
ब्रह्म मुहूर्त: सुबह बहुत जल्दी – ध्यान-जप के लिए सर्वोत्तम।
राहुकाल: लगभग 10:30 AM – 12:00 PM (या 11:13 AM – 12:39 PM) – इस समय शुभ कार्य टालें।
यमगंड: दोपहर बाद
गुलिक काल: सुबह
दुर्मुहूर्त: सुबह कुछ समय
व्रत और पूजा का महत्व
आमलकी एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित है। इस दिन आंवला (अमलकी) वृक्ष की पूजा की जाती है, क्योंकि आंवला विष्णु प्रिय माना जाता है। व्रत रखने से पाप नाश, स्वास्थ्य लाभ, समृद्धि और मोक्ष की प्राप्ति होती है। ब्रह्मांड पुराण के अनुसार, इस व्रत का पुण्य अन्य एकादशियों से भी अधिक बताया गया है।
पूजा विधि संक्षेप में:
सुबह स्नान के बाद विष्णु मंदिर या घर में आंवला वृक्ष (या आंवला फल) की पूजा करें।
पीले वस्त्र पहनें, आंवला प्रसाद चढ़ाएं।
विष्णु सहस्रनाम, एकादशी व्रत कथा पढ़ें या सुनें।
फलाहार/जलाहार व्रत रखें (अनाज त्याग)।
पराना (व्रत खोलना): कल 28 फरवरी 2026 को सुबह 6:47 AM से 9:06 AM तक (द्वादशी तिथि पर)।
धर्मशाला और हिमाचल के भक्तों के लिए यह मौसम भी अनुकूल है – ठंडी हवाओं में आंवला पूजन और विष्णु भक्ति का आनंद दोगुना हो जाता है। आज के दिन भक्तजन मंदिरों में विशेष दर्शन और पूजा-अर्चना कर रहे हैं। भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की कृपा से सभी के जीवन में सुख, शांति और स्वास्थ्य बने रहे। 🌿🙏 हरि ॐ
आमलकी एकादशी को रंगभरी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। आमलकी एकादशी का व्रत फाल्गुन मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को रखा जाता है। इस दिन भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी और भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने का विशेष महत्व शास्त्रों में बताया गया है। इस दिन आंवले के पेड़ की पूजा का भी विशेष विधान है। इस बार आमलकी एकादशी का व्रत 27 फरवरी को किया जाएगा। इस दिन विधि विधान से पूजा पाठ करने से व्यक्ति की सभी मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती है। आंवले के पेड़ में भगवान का वास माना जाता है। आंवले के पेड़ में ब्रह्मा, विष्णु और महेश वास करते हैं। आमलकी एकादशी के दिन लक्ष्मी नारायण के साथ साथ आंवले के पेड़ की पूजा करने से पुण्य फल की प्राप्ति होती है। पद्म पुराण में भी आमलकी एकादशी व्रत की कथा और महिमा का वर्णन मिलता है।