भारतीय ज्योतिष शास्त्र में पंचांग का अपना महत्व है। पंचांग के अनुसार ही हम अपने धार्मिक क्रियाकलाप करते हैं। शुभ अशुभ का ज्ञान हमें प्राप्त होता है। आइये जानते हैं, आज के पंचांग के अनुसार कब है शुभ मुहूर्त और कब तक है राहुकाल और क्या है ग्रह चाल। आज शुक्रवार है और हिंदू पंचांग के अनुसार भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि है। यह दिन भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव **श्रीकृष्ण जन्माष्टमी** के कारण बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। धर्मशाला और हिमाचल प्रदेश के आसपास के क्षेत्रों में भी आज श्रद्धालु व्रत रखकर रात में भगवान श्रीकृष्ण की पूजा-अर्चना करेंगे। पंचांग के अनुसार आज अष्टमी तिथि मध्यरात्रि के बाद लगभग **12:13 बजे तक** रहेगी। इसके बाद नवमी तिथि प्रारंभ होगी। आज **रोहिणी नक्षत्र** रात लगभग **11:04 बजे तक** रहेगा। इसके बाद मृगशिरा नक्षत्र शुरू होगा। चंद्रमा आज **वृषभ राशि** में स्थित रहेगा। जन्माष्टमी पर रोहिणी नक्षत्र और अष्टमी तिथि का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है।
हिन्दू पंचांग के अनुसार आज भाद्रपद, कृष्ण, अष्टमी, शुक्रवार, है। सूर्य दक्षिणायन, उत्तर गोल, वर्षा ऋतु। शक संवत 1948 , विक्रमी संवत 2083, 4 सितंबर 2026, राहुकाल सुबह 10 बजकर 30 मिनट से दोपहर 12 बजकर 00 मिनट तक।
4 सितंबर 2026 का पंचांग
दिन:** शुक्रवार
**तारीख:** 4 सितंबर 2026
**मास:** भाद्रपद
**पक्ष:** कृष्ण पक्ष
तिथि:** अष्टमी मध्यरात्रि 12 बजकर 13 मिनट ;5 सितंबरद्ध तक उपरांत नवमी तिथि का आरंभ।
नक्षत्र:** रोहिणी - समाप्ति:** 4 सितंबर को लगभग 11:04 PM
**योग:** हर्षण
**योग समाप्ति:** लगभग 3:44 PM
**करण:** बालव, इसके बाद कौलव
**चंद्र राशि:** वृषभ
**सूर्य राशि:** सिंह
**ऋतु:** शरद
**अयन:** दक्षिणायन
**विक्रम संवत:** 2083, सिद्धार्थी
**शक संवत:** 1948, पराभव
सूर्योदय और सूर्यास्त
सूर्योदय का समय: प्रातः 06:00 बजे
सूर्यास्त का समय: सायं 06:39 बजे
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी 2026
4 सितंबर 2026, शुक्रवार को **श्रीकृष्ण जन्माष्टमी** मनाई जाएगी। इस दिन भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप की पूजा की जाती है और श्रद्धालु दिनभर व्रत रखते हैं। रात्रि में निशीथ काल के दौरान श्रीकृष्ण जन्मोत्सव मनाने की परंपरा है।
**निशीथ पूजा मुहूर्त:** लगभग **रात 11:58 बजे से 12:43 बजे तक**
**अवधि:** लगभग 45 मिनट
**मध्यरात्रि:** लगभग 12:21 AM
**चंद्रोदय:** लगभग 11:22 PM के आसपास
जन्माष्टमी पूजा का वास्तविक समय शहर के अनुसार कुछ मिनट आगे-पीछे हो सकता है।
## अष्टमी तिथि का समय
अष्टमी तिथि प्रारंभ:** 4 सितंबर की रात/भोर में लगभग **2:25 AM
अष्टमी तिथि समाप्त:** 5 सितंबर को लगभग **12:13 AM
इस प्रकार 4 सितंबर को सूर्योदय के समय अष्टमी तिथि विद्यमान रहेगी और इसी कारण जन्माष्टमी का पर्व आज मनाया जाएगा।
रोहिणी नक्षत्र
**रोहिणी नक्षत्र प्रारंभ:** 4 सितंबर को लगभग **12:29 AM**
**रोहिणी नक्षत्र समाप्त:** 4 सितंबर को लगभग **11:04 PM**
श्रीकृष्ण का जन्म रोहिणी नक्षत्र से जुड़ा होने के कारण जन्माष्टमी पर इस नक्षत्र का विशेष महत्व माना जाता है।
शुभ मुहूर्त
ब्रह्म मुहूर्त - सुबह में 03 बजकर 55 मिनट से सुबह 04 बजकर 41 मिनट तक ।
अभिजीत मुहूर्त - दोपहर 11 बजकर 55 मिनट से 12 बजकर 45 मिनट तक ।
अमृत काल - रात्रि 08 बजकर 03 मिनट से रात्रि 09 बजकर 33 मिनट तक ।
*विजय मुहूर्त:** दोपहर बाद
गोधूलि मुहूर्त:** सूर्यास्त के आसपास
निशीथ मुहूर्त:** रात लगभग 11:58 बजे से 12:43 बजे तक
अशुभ मुहूर्त
राहुकाल - सुबह 10 बजकर 30 मिनट से दोपहर 12 बजकर 00 मिनट तक ।
गुलिक काल- सुबह 07 बजकर 30 मिनट से 09 बजकर 00 मिनट तक ।
यमगंड - दोपहर 03 बजकर 30 मिनट से शाम 05 बजकर 00 मिनट तक ।
जन्माष्टमी के लिए सबसे महत्वपूर्ण समय **निशीथ काल** है, क्योंकि इसी दौरान भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव की पूजा की जाती है। 4 सितंबर को अष्टमी तिथि के दौरान पहले **बालव करण** और उसके बाद **कौलव करण** रहेगा। पंचांग के पांच प्रमुख अंगों में करण भी महत्वपूर्ण अंग माना जाता है। **हर्षण योग** रहेगा, जो लगभग दोपहर बाद **3:44 बजे** तक बताया गया है। इसके बाद अगले योग की गणना होगी। आज चंद्रमा **वृषभ राशि** में रहेगा। रोहिणी नक्षत्र भी वृषभ राशि से संबंधित है। ज्योतिषीय दृष्टि से रोहिणी को चंद्रमा का प्रिय नक्षत्र माना जाता है।
## जन्माष्टमी पर पूजा विधि
जन्माष्टमी के दिन श्रद्धालु प्रातः स्नान करके व्रत का संकल्प लेते हैं। भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप की पूजा के लिए झूला सजाया जाता है। रात में निशीथ काल के समय भगवान कृष्ण का जन्मोत्सव मनाकर उनका अभिषेक किया जाता है। उन्हें पीले वस्त्र, माखन-मिश्री, फल, पंचामृत और तुलसी दल अर्पित किए जाते हैं। पूजा के बाद आरती की जाती है और श्रद्धालु भगवान श्रीकृष्ण के जन्म की खुशी में प्रसाद वितरित करते हैं।
जन्माष्टमी व्रत पारण
धर्मशास्त्रीय गणना के अनुसार 2026 में जन्माष्टमी व्रत का पारण **5 सितंबर को सूर्योदय के बाद** किया जा सकता है, क्योंकि पारण के दिन अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र सूर्योदय से पहले समाप्त हो जाते हैं। कुछ स्थानों पर स्थानीय परंपरा के अनुसार निशीथ पूजा के बाद भी पारण किया जाता है।
5 सितंबर को दही हांडी
जन्माष्टमी के अगले दिन **5 सितंबर 2026, शनिवार** को दही हांडी का पर्व मनाया जाएगा।
धार्मिक महत्व
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी भगवान विष्णु के आठवें अवतार भगवान श्रीकृष्ण के जन्म की स्मृति में मनाई जाती है। यह पर्व भक्तों को धर्म, कर्म, भक्ति और सत्य के मार्ग पर चलने का संदेश देता है। जन्माष्टमी की रात्रि में मंदिरों और घरों में विशेष पूजा, भजन-कीर्तन तथा झांकियों का आयोजन किया जाता है।
कोई भी शुभ समय या मुहूर्त के दौरान, राहुकाल गुलिक काल, यमगण्ड काल से बचना चाहिए क्योंकि ये समय अशुभ माना जाता है। अपने दैनिक पंचांग को रोजाना देखें और किसी भी नए काम को शुरू करने के लिए इसका पालन करें जैसे कि वैवाहिक समारोह, सामाजिक मामलों, महत्वपूर्ण कार्यक्रमों, उद्घाटन, नए व्यापार उपक्रम आदि जैसे शुभ कार्यक्रम इसके अनुसार करें।
**नोट:** पंचांग के सूर्योदय, सूर्यास्त, राहुकाल और पूजा मुहूर्त स्थान के अनुसार बदलते हैं। ऊपर दिए गए समय धर्मशाला/हिमाचल क्षेत्र को ध्यान में रखकर दिए गए हैं। किसी विशेष पूजा या व्रत के लिए स्थानीय पंचांग अथवा विद्वान पंडित से समय की पुष्टि करना उचित रहेगा।