उपायुक्त किरण भड़ाना ने कहा कि पोरी मेला केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि आस्था, सांस्कृतिक विरासत, सामाजिक समरसता और सामुदायिक सहभागिता का संगम है। भगवान त्रिलोकीनाथ की पवित्र भूमि पर आयोजित यह मेला लाहौल-स्पीति की उस अनूठी परंपरा को दर्शाता है, जहां विभिन्न धार्मिक मान्यताएं आपसी सम्मान और सद्भाव के साथ आगे बढ़ती हैं।