हिमाचल प्रदेश की लोक संस्कृति और पहाड़ी संगीत को अपनी आवाज से नई पहचान देने वाली प्रसिद्ध लोकगायिका Geeta Bhardwaj आज प्रदेश ही नहीं बल्कि देशभर में पहाड़ी संगीत की एक मजबूत पहचान बन चुकी हैं। उनकी मधुर आवाज में गूंजते लोकगीत हिमाचल की संस्कृति, परंपरा और पहाड़ी जीवन की झलक प्रस्तुत करते हैं।
सराजघाटी के छोटे से गांव से शुरू हुआ सफर
गीता भारद्वाज हिमाचल प्रदेश के मंडी जिला की सराजघाटी के थुनाग क्षेत्र से सटे ग्राम पंचायत सुनाह लंबाथाच के एक छोटे से गांव थाच की रहने वाली हैं। पहाड़ों की गोद में बसे इसी छोटे से गांव में उनका बचपन बीता। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने अपने सपनों को कभी छोटा नहीं होने दिया।
गीता भारद्वाज एक साधारण और आर्थिक रूप से कमजोर परिवार में पली-बढ़ी हैं, लेकिन संगीत के प्रति उनका जुनून बचपन से ही साफ दिखाई देता था। खास बात यह है कि उन्होंने बिना किसी औपचारिक कोचिंग या विशेष रियाज के अपनी प्रतिभा के दम पर संगीत की दुनिया में पहचान बनाई।
स्कूल से ही दिखने लगी प्रतिभा
गीता ने अपना पहला गीत “लाल सूट नी लाणा” उस समय गाया था जब वह प्राइमरी स्कूल थाचाधार में पढ़ती थीं। इस गीत को गाने के बाद उन्हें खूब सराहना मिली और यहीं से उनके भीतर गायिका बनने का सपना और मजबूत हो गया।
उन्होंने अपनी दसवीं की पढ़ाई राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला थुनाग से पूरी की। इसके बाद उच्च शिक्षा के लिए उन्होंने Himachal Pradesh University की दूरवर्ती शिक्षा प्रणाली के माध्यम से बीए की पढ़ाई पूरी की।
आकाशवाणी से मिली पहचान
गीता भारद्वाज के संगीत करियर की शुरुआत All India Radio (आकाशवाणी) शिमला से हुई। आकाशवाणी के मंच ने उन्हें अपनी प्रतिभा को निखारने और व्यापक श्रोताओं तक पहुंचाने का अवसर दिया।
इसके बाद उन्होंने अपनी पहली पहाड़ी म्यूजिक एलबम “जानेमन” रिलीज की। इस एलबम के बाद गीता भारद्वाज का नाम धीरे-धीरे हिमाचल के कोने-कोने में प्रसिद्ध हो गया और वे लोकसंगीत की लोकप्रिय गायिका बन गईं।
कई भाषाओं में गाती हैं गीत
गीता भारद्वाज की खासियत यह है कि वह कई भाषाओं में गीत गाती हैं। उन्हें पहाड़ी, हिंदी, पंजाबी, मंडयाली, सिरमौरी और लाहुली भाषाओं में गाना पसंद है। उनकी आवाज में पारंपरिक लोकधुनों के साथ आधुनिक संगीत का भी सुंदर मेल देखने को मिलता है।
इंडियन आइडल में पहुंचकर बढ़ाई हिमाचल की शान
साल 2013 में गीता भारद्वाज ने लोकप्रिय सिंगिंग रियलिटी शो Indian Idol में हिस्सा लिया। खास बात यह रही कि बिना किसी विशेष तैयारी के उन्होंने इस प्रतियोगिता में टॉप-25 तक पहुंचकर हिमाचल प्रदेश का नाम रोशन किया।
बड़े कलाकारों के साथ मंच साझा
गीता भारद्वाज ने कई बड़े कलाकारों के साथ भी मंच साझा किया है। वह प्रसिद्ध भजन गायिका Anuradha Paudwal के साथ भी गीत गा चुकी हैं, जो उनके संगीत सफर की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जाती है।
लोगों के दिलों की धड़कन बनी आवाज
करीब एक दशक से अधिक समय से लोकसंगीत की दुनिया में सक्रिय गीता भारद्वाज आज भी अपने गीतों से लोगों के दिलों में खास जगह बनाए हुए हैं। उनके गीत हिमाचल की लोकसंस्कृति को जीवंत रखते हैं और नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ते हैं।
आज गीता भारद्वाज हिमाचल की उन चुनिंदा महिला कलाकारों में गिनी जाती हैं, जिन्होंने पहाड़ी लोकसंगीत को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में अहम योगदान दिया है। उनकी आवाज आज भी पहाड़ों की वादियों में गूंजती है और लोगों के दिलों की धड़कन बनी हुई है।