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97वीं जयंती | Lata Mangeshkar 97th Birth Anniversary: सुरों की अमर आवाज को नमन

Updated on Monday, September 28, 2026 10:27 AM IST

लता मंगेशकर की 97वीं जयंती: सुरों की वह आवाज, जो कभी खामोश नहीं होगी

भारतीय संगीत के इतिहास में कुछ आवाजें ऐसी होती हैं, जो केवल गीत नहीं गातीं, बल्कि पीढ़ियों की भावनाओं को अपनी आवाज देती हैं। **लता मंगेशकर** उन्हीं महान आवाजों में से एक थीं। 28 सितंबर 1929 को इंदौर में जन्मीं लता मंगेशकर ने अपनी असाधारण प्रतिभा, साधना और समर्पण से भारतीय फिल्म संगीत को एक ऐसी पहचान दी, जिसकी गूंज आज भी कायम है। वर्ष 2026 में उनकी **97वीं जयंती** मनाई जा रही है।

लता मंगेशकर का संगीत सफर आसान नहीं था। बचपन से ही उन्हें संगीत का संस्कार अपने पिता और प्रसिद्ध रंगमंच एवं शास्त्रीय गायक **पंडित दीनानाथ मंगेशकर** से मिला। पिता के मार्गदर्शन में संगीत की शुरुआती शिक्षा प्राप्त करने वाली लता ने कम उम्र में ही मंच और फिल्मों में काम करना शुरू कर दिया था।

समय के साथ उनकी आवाज ने हिंदी सिनेमा के संगीत को एक नया आयाम दिया। उनकी गायकी में शास्त्रीय संगीत की गहराई, शब्दों की स्पष्टता और भावनाओं की ऐसी अभिव्यक्ति थी कि गीत सुनने वाला स्वयं को उसकी कहानी का हिस्सा महसूस करने लगता था।

### सात दशकों से अधिक लंबा संगीत सफर

लता मंगेशकर ने हिंदी के अलावा मराठी, बंगाली, गुजराती, तमिल, तेलुगु, कन्नड़, मलयालम और कई अन्य भाषाओं में भी गीत रिकॉर्ड किए। उन्होंने अलग-अलग दौर के संगीतकारों और गायकों के साथ काम किया और बदलते फिल्म संगीत के बीच अपनी विशिष्ट पहचान बनाए रखी।

उनकी आवाज में कभी प्रेम की कोमलता सुनाई दी तो कभी विरह की पीड़ा। देशभक्ति के गीतों में वही आवाज राष्ट्रभावना को स्वर देती नजर आई। **“ऐ मेरे वतन के लोगों”** जैसे गीत ने उन्हें देश की सामूहिक स्मृति का हिस्सा बना दिया।

वहीं **“लग जा गले”**, **“अजीब दास्तां है ये”**, **“प्यार किया तो डरना क्या”** और **“तेरे बिना जिंदगी से”** जैसे गीतों ने उनकी बहुआयामी गायकी को अमर कर दिया।

### सम्मान भी मिले, जिम्मेदारी भी बढ़ी

लता मंगेशकर को उनके योगदान के लिए देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान **भारत रत्न** सहित अनेक प्रतिष्ठित सम्मानों से सम्मानित किया गया। उन्हें **पद्म भूषण, पद्म विभूषण और दादा साहेब फाल्के पुरस्कार** भी प्राप्त हुआ।

लेकिन उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि शायद पुरस्कारों की लंबी सूची नहीं, बल्कि वह स्थायी स्थान है जो उन्होंने करोड़ों श्रोताओं के दिलों में बनाया।

### आवाज के पीछे थी वर्षों की साधना

लता मंगेशकर की गायकी को केवल उनकी मधुर आवाज तक सीमित करके देखना उनके योगदान को छोटा करना होगा। उच्चारण, सुर, ताल, भाव और गीत की परिस्थिति को समझकर उसे आवाज में ढालने की उनकी क्षमता उन्हें विशिष्ट बनाती थी।

उनके गीतों की लोकप्रियता का एक कारण यह भी रहा कि वे अलग-अलग पीढ़ियों की भावनाओं से जुड़ते रहे। उनके गीत रेडियो के दौर से लेकर कैसेट, सीडी, टेलीविजन और डिजिटल स्ट्रीमिंग तक श्रोताओं के साथ चलते रहे।

### देह चली गई, स्वर रह गया

6 फरवरी 2022 को लता मंगेशकर के निधन से भारतीय संगीत जगत ने अपनी एक महान स्वर-साधिका को खो दिया। लेकिन उनकी आवाज का संसार आज भी जीवंत है।

नई पीढ़ी के श्रोता भी उनके गीत सुनते हैं, संगीत सीखने वाले उनके गायन से प्रेरणा लेते हैं और संगीत प्रेमी उनके स्वर में भारतीय फिल्म संगीत के एक पूरे युग की झलक देखते हैं।

**97वीं जयंती पर लता मंगेशकर को याद करना केवल एक महान गायिका को श्रद्धांजलि देना नहीं, बल्कि उस संगीत परंपरा को याद करना है जिसने भारतीय सिनेमा की भावनाओं को करोड़ों लोगों तक पहुंचाया।**

उनका जीवन यह भी बताता है कि महानता केवल प्रतिभा से नहीं आती—उसके पीछे वर्षों की साधना, अनुशासन और संगीत के प्रति समर्पण होता है।

*लता जी आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनके सुर आज भी हमारे बीच हैं। यही किसी कलाकार की सबसे बड़ी विरासत है। * #LataMangeshkar #LataMangeshkarJayanti #भारतकोकिला #IndianMusic #Bollywood

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