स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण का प्रश्न भी गंभीर होता जा रहा है। मैक्लोडगंज के निकट स्थित डल झील इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। कभी धार्मिक और प्राकृतिक महत्व का केंद्र रही यह झील आज प्रदूषण और उपेक्षा का सामना कर रही है। यदि प्राकृतिक धरोहरों की समय रहते सुरक्षा नहीं की गई तो आने वाली पीढ़ियां केवल तस्वीरों में ही इन स्थलों की सुंदरता देख पाएंगी।
ज्वालामुखी, कांगड़ा और चिंतपूर्णी जैसे प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों पर श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या पहुंचती है, लेकिन गुणवत्तापूर्ण आवास और अन्य सुविधाओं की कमी के कारण पर्यटक अधिक समय तक यहां नहीं ठहरते।
अभ्यास के उपरांत आयोजित समीक्षा बैठक में पाया गया कि जिला स्तर पर कमांड एवं नियंत्रण व्यवस्था, अंतर-विभागीय समन्वय तथा संचार प्रणाली प्रभावी रही। साथ ही भविष्य में वैकल्पिक उपग्रह संचार व्यवस्था, भीड़ प्रबंधन, आपातकालीन यातायात मार्गों तथा संसाधन तैनाती तंत्र को और अधिक सुदृढ़ बनाने की आवश्यकता भी चिन्हित की गई।
उन्होंने बताया कि इस पहल के तहत औपचारिक (सेरेमोनियल) वर्दी में पुलिस कर्मियों को प्रमुख सार्वजनिक स्थलों पर तैनात किया गया है, जो पर्यटकों की सहायता, मार्गदर्शन, वरिष्ठ नागरिकों की मदद तथा आपात परिस्थितियों में त्वरित प्रतिक्रिया सुनिश्चित करेंगे। इन पुलिस कर्मियों की सहज उपस्थिति ने पर्यटकों और स्थानीय निवासियों में सुरक्षा और विश्वास की भावना को काफी मजबूत किया है।
वार्ड नंबर 1 (फरसेटगंज) से हिमांशी ने आईएनसी की तरफ से नामांकन दाखिल किया है। वार्ड नंबर 3 (मैक्लोडगंज) से आशा देवी ने भाजपा और सुदर्शना देवी ने आईएनसी की तरफ से नामांकन प्रस्तुत किया है। वार्ड नंबर 4 (कश्मीर हाउस) से नेहा संगल ने भाजपा तथा वार्ड नंबर 5 (खजांची मोहल्ला) से अरुणा कुमारी ने भाजपा की तरफ से अपना नामांकन दाखिल किया है।
इस अवसर पर सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का आयोजन किया गया, जिसमें विभिन्न राज्यों की लोकसंस्कृति की सुंदर झलक देखने को मिली। कार्यक्रम के समापन पर प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र वितरित किए गए तथा उनसे कार्यक्रम संबंधी फीडबैक भी लिया गया।
डॉ. सहजल ने कहा कि संसद में भाजपा सांसदों द्वारा उठाए गए सवालों के जवाब में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि 2025 के मानसून के दौरान हिमाचल प्रदेश में 50000 मीटर से अधिक राष्ट्रीय राजमार्ग क्षतिग्रस्त हुए, जिनका मुख्य कारण लैंडस्लाइड, फ्लैश फ्लड और क्लाउड बर्स्ट रहा।
पीएचसी चड़ी, स्वास्थ्य खंड शाहपुर में आयोजित कार्यक्रम में विधायक केवल सिंह पठानिया, मुख्य चिकित्सा अधिकारी कांगड़ा डॉ. विवेक करोल, बीएमओ शाहपुर डॉ. कविता ठाकुर, डॉ. ईशा, डॉ. शिप्रा ठाकुर, हेल्थ सुपरवाइज़र एवं अन्य स्टाफ सदस्य उपस्थित रहे।
इन उप-मंडलों/क्षेत्रों में केवल ई-रिक्शा को ही नए पंजीकरण की अनुमति दी जाएगी। राज्य के शेष उप-मंडलों में ऑटो-रिक्शा/ई-रिक्शा का परिचालन निषिद्ध रहेगा, हालांकि, यह प्रतिबंध राज्य में वैध परमिट के आधार पर पहले से चल रहे ऑटो-रिक्शा पर लागू नहीं होगा। इस अधिसूचना के तहत पंजीकृत/अधिकृत प्रत्येक ई-रिक्शा के परिचालन का क्षेत्र संबंधित उप-मंडल के मुख्यालय से 20 किलोमीटर की परिधि तक ही सीमित रहेगा, जहाँ ऐसा पंजीकरण/प्राधिकार प्रदान किया गया है।
मंदिर के भीतर गादेन शार्टसे, द्रेपुंग गोमांग, ग्यूतो और नामग्याल मठों के आचार्य, गांदेन त्री रिनपोछे, शार्पा चोजे, थोंगतोग रिनपोछे और ल्हाग्याला रिनपोछे के युवा अवतार सहित कई वरिष्ठ लामा उपस्थित रहे। प्रार्थना के दौरान तिब्बती मंदिर में लगभग 3500 श्रद्धालु उपस्थित रहे।