ब्रेकिंग - हाई कोर्ट ने हिमाचल के DGP व कांगड़ा की एसपी को हटाने के दिए आदेश
हिमाचल हाईकोर्ट ने मंगलवार को पुलिस महानिदेशक (DGP) संजय कुंडू और SP कांगड़ा शालिनी अग्निहोत्री को वर्तमान पद से मुक्त करने के निर्देश दिए। हिमाचल से संबंध रखने वाले नोएडा के कारोबारी निशांत शर्मा मामले की सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश एमएस रामचंद्र राव और न्यायाधीश ज्योत्सना रेवाल दुआ ने कहा कि निष्पक्ष जांच इन्हें दूसरे पद पर शिफ्ट करना जरूरी है।
हिमाचल हाईकोर्ट ने प्रदेश पुलिस के डीजीपी संजय कुंडू और कांगड़ा की एसपी शालिनी अग्निहोत्री को पदों से हटाने के आदेश दिए हैं। मुख्य न्यायाधीश एमएस रामचंद्र राव और न्यायाधीश ज्योत्सना रिवाल दुआ की खंडपीठ ने गृह सचिव को इसके बारे में शीघ्र ही जरूरी कदम उठाने के आदेश जारी किए हैं। हाईकोर्ट ने पुलिस के दोनों उच्च अधिकारियों को ऐसे पदों पर नियुक्त करने के आदेश दिए, जहां से दोनों को मामले में दर्ज प्राथमिकी की जांच प्रभावित करने का अवसर न मिले।
हाईकोर्ट ने आदेश जारी करते हुए कहा कि मामले में पता नहीं क्यों गृह सचिव ने अपनी आंखें मूंद लीं। कोर्ट ने कहा कि मामले की निष्पक्ष जांच और न्याय न केवल होना चाहिए, अपितु दिखना भी चाहिए। इस सिद्धांत को देखते हुए अधिकारियों को मौजूदा पदों पर रहना वाजिब नहीं होगा। पालमपुर के कारोबारी निशांत कुमार शर्मा की सुरक्षा से जुड़े मामले पर सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने आदेश जारी किया। मामले में प्रार्थी निशांत ने अपने और परिवार की सुरक्षा के खतरे के बारे में हाईकोर्ट को ईमेल के माध्यम से अवगत करवाया था।
ईमेल को आपराधिक रिट याचिका में तब्दील करते हुए हाईकोर्ट ने अंतरिम आदेश पारित कर एसपी शिमला और एसपी कांगड़ा को प्रार्थी को उचित सुरक्षा मुहैया करवाने के आदेश दिए। पिछली सुनवाई के दौरान एसपी कांगड़ा ने बताया कि प्रार्थी की शिकायत पर दर्ज प्राथमिकी में लगाए आरोपों की जांच अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक कांगड़ा को सौंपी जा चुकी है। इसमें एसपी शिमला ने ऊंचे लोगों की संलिप्तता का अंदेशा जताया था। एसपी शिमला की जांच में प्रथमदृष्टया पाया कि डीजीपी कारोबारी की ओर से बताए गए एक रसूखदार व्यक्ति के संपर्क में रहे। जांच में यह भी पाया कि डीजीपी ने 27 अक्तूबर को निशांत को 15 मिस्ड कॉल कीं। यह बात भी सामने आई कि डीजीपी ने कारोबारी पर निगरानी रखी।
वहीं, कांगड़ा एसपी की ओर से मामले में देरी से प्राथमिकी दर्ज करने का कोई कारण नहीं बताया गया। एसपी कांगड़ा कोर्ट को यह भी नहीं बता पाईं कि मामले में एसपी शिमला की जांच में सामने लाए तथ्यों का उपयोग कांगड़ा में दर्ज प्राथमिकी की जांच में क्यों नहीं किया गया। कोर्ट ने कहा कि इन तथ्यों के मद्देनजर मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए यह मामला अपने हाथों में लेने को मजबूर होना पड़ा।
बताते चलें कि कारोबारी निशांत कुमार शर्मा ने 28 अक्तूबर को हाईकोर्ट को ईमेल के माध्यम से अपनी और अपने परिवार की जान को खतरे की बात लिखी। कारोबारी ने लिखा कि गुरुग्राम में भी उस पर हमला हो चुका है, जिसमें वह बच गया। वारदात की रिपोर्ट वापस लेने के लिए उसे दो बाइक सवार व्यक्तियों ने भागसूनाग और मैक्लोडगंज के बीच वाले रास्ते में रोक कर धमकाया। ईमेल के मुताबिक डीजीपी कार्यालय से उसे एक ही दिन में 14 फोन आए। उसे डीएसपी और एसएचओ पालमपुर ने भी फोन किए। एसएचओ पालमपुर ने मैसेज कर बताया कि डीजीपी उससे बात करना चाहते हैं इसलिए उसे डीजीपी कार्यालय में वापस कॉल कर लेनी चाहिए।
कॉल बैक करने पर डीजीपी ने कहा कि निशांत शिमला आकर उनसे मिलें। जब निशांत ने कहा कि वह क्यों उनसे मिलें तो डीजीपी ने कहा कि उसे शिमला आना होगा और मिलना होगा। ईमेल के माध्यम से निशांत ने हिमाचल के ही दो रसूखदार लोगों पर जबरन वसूली का दबाव बनाने की बात भी कही। कोर्ट की ओर से संज्ञान लेने के बाद ही प्रार्थी के आरोपों की प्राथमिकी कांगड़ा जिले में दर्ज की गई है।