धर्मशाला। नेपाल के रसुवा क्षेत्र और तिब्बत के क्यिरोंग में आई विनाशकारी बाढ़ से हुई जनहानि और भारी संरचनात्मक नुकसान पर तिब्बती धर्मगुरु दलाई लामा ने गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने इस प्राकृतिक त्रासदी में जान गंवाने वाले लोगों के लिए प्रार्थना करते हुए शोक संतप्त परिवारों और आपदा से प्रभावित सभी लोगों के प्रति हार्दिक संवेदना प्रकट की।
दलाई लामा ने अपने संदेश में कहा कि रसुवा और क्यिरोंग क्षेत्र में बाढ़ से हुई तबाही की खबर सुनकर वह बेहद दुखी हैं। उन्होंने कहा कि इस त्रासदी में जिन लोगों ने अपनी जान गंवाई है, उनके लिए वह प्रार्थना करते हैं और उनके परिवारों के दुख में सहभागी हैं। उन्होंने बाढ़ से प्रभावित सभी लोगों के प्रति भी अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त कीं।
दलाई लामा ने इस क्षेत्र में प्राकृतिक आपदाओं के बार-बार सामने आने को लेकर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि क्षेत्र पहले भी ऐसी calamities का सामना कर चुका है। उनके अनुसार, लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाएं किसी गहरे अंतर्निहित कारण की ओर संकेत करती हैं। उन्होंने इसके संभावित कारणों में जलवायु परिवर्तन अथवा अन्य कारकों की संभावना का उल्लेख किया।
उन्होंने उम्मीद जताई कि भविष्य में ऐसी आपदाओं की पुनरावृत्ति को रोकने के लिए जहां तक संभव हो, उचित और प्रभावी कदम उठाए जाएंगे। दलाई लामा ने आपदा प्रभावित क्षेत्रों में आवश्यक उपायों के साथ-साथ भविष्य में ऐसी घटनाओं के प्रभाव को कम करने की दिशा में गंभीर प्रयास किए जाने की आवश्यकता पर बल दिया।
नेपाल का रसुवा जिला तिब्बत के साथ लगी उत्तरी सीमा पर स्थित है और क्यिरोंग क्षेत्र भी सीमा के निकट महत्वपूर्ण इलाका है। ऐसे में दोनों क्षेत्रों में प्राकृतिक आपदाओं का असर सीमावर्ती आबादी, आवागमन और बुनियादी ढांचे पर पड़ता है।
दलाई लामा ने अपने संदेश का समापन प्रभावित लोगों के लिए प्रार्थना करते हुए किया और कहा कि उनकी प्रार्थनाएं इस त्रासदी से प्रभावित लोगों के साथ हैं।