धर्मशाला/लेह। तिब्बती समुदाय आज दुनिया भर में अपने आध्यात्मिक गुरु एवं नोबेल शांति पुरस्कार विजेता 14वें दलाई लामा का 91वां जन्मदिन श्रद्धा, उत्साह और प्रार्थनाओं के साथ मना रहा है। इस अवसर पर हिमाचल प्रदेश के मैकलोडगंज से लेकर लद्दाख के लेह तक धार्मिक अनुष्ठानों, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और दीर्घायु प्रार्थनाओं का आयोजन किया गया है। इस वर्ष दलाई लामा स्वयं लेह में मौजूद हैं, जहां श्येवात्सेल (Shewatsel) शिक्षण मैदान में उनके जन्मदिवस का मुख्य समारोह आयोजित किया गया।
लेह में हजारों श्रद्धालु, बौद्ध भिक्षु, स्थानीय नागरिक और देश-विदेश से पहुंचे अनुयायी सुबह से ही समारोह में शामिल हुए। विशेष प्रार्थनाओं के बीच दलाई लामा के उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु और विश्व शांति की कामना की गई। उनके जन्मदिन के अवसर पर सांस्कृतिक प्रस्तुतियां, पारंपरिक नृत्य और धार्मिक अनुष्ठान भी आयोजित किए गए।
उधर हिमाचल प्रदेश के मैकलोडगंज स्थित त्सुगलाखांग परिसर और विभिन्न तिब्बती मठों में भी प्रार्थना सभाएं आयोजित की गईं। श्रद्धालुओं ने दीप प्रज्ज्वलित कर दलाई लामा के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त की। मैकलोडगंज, जिसे तिब्बती निर्वासित समुदाय की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक राजधानी माना जाता है, हर वर्ष उनके जन्मदिन पर विशेष उत्सव का साक्षी बनता है।
दलाई लामा का जन्म 6 जुलाई 1935 को तिब्बत के अमदो क्षेत्र के ताकत्सेर गांव में हुआ था। वर्ष 1989 में उन्हें अहिंसा, करुणा और विश्व शांति के लिए किए गए योगदान के सम्मान में नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया। पिछले कई दशकों से वे प्रेम, करुणा, धार्मिक सद्भाव और मानवीय मूल्यों का संदेश दुनिया भर में देते रहे हैं।
इस वर्ष स्वास्थ्य संबंधी उपचार के बाद दलाई लामा जून के अंत में लेह पहुंचे थे और वहीं से उन्होंने अपने जन्मदिन समारोह में भाग लिया। उनके कार्यालय द्वारा इस अवसर पर समारोह का सीधा प्रसारण भी किया गया, जिसे दुनिया भर के लाखों अनुयायियों ने देखा।