धर्मशाला, 13 मार्च: Dharamshala स्थित Tibetan Institute of Performing Arts में आयोजित दो दिवसीय 8वां ऑल इंडिया तिब्बत सपोर्ट ग्रुप्स कॉन्फ्रेंस का समापन 13 मार्च 2026 को दोपहर 2:30 बजे आयोजित वैलेडिक्टरी सत्र के साथ हुआ। इस सम्मेलन में देशभर से तिब्बत समर्थक संगठनों के प्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता और विभिन्न क्षेत्रों के प्रमुख लोग शामिल हुए।
इस सम्मेलन का आयोजन Core Group for the Tibetan Cause – India द्वारा किया गया, जबकि इसका संचालन दिल्ली स्थित India Tibet Coordination Office ने किया। दो दिनों तक चले इस सम्मेलन में तिब्बत से जुड़े मुद्दों, मानवाधिकार, पर्यावरण और तिब्बती आंदोलन को मजबूत करने पर चर्चा की गई।
समापन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में Khenpo Sonam Tenphel, स्पीकर Tibetan Parliament-in-Exile उपस्थित रहे, जबकि विशेष अतिथि के रूप में Norzin Dolma, मंत्री (डिपार्टमेंट ऑफ इंफॉर्मेशन एंड इंटरनेशनल रिलेशंस) Central Tibetan Administration ने कार्यक्रम को संबोधित किया।
इस अवसर पर R.K. Khrimey (राष्ट्रीय संयोजक, Core Group for the Tibetan Cause – India), Anand Kumar (राष्ट्रीय अध्यक्ष, India-Tibet Friendship Society), Surendra Kumar (राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, ITFS), Lobsang Genchen और Amit Jyotikar सहित कई क्षेत्रीय संयोजक और तिब्बत समर्थक संगठनों के पदाधिकारी उपस्थित रहे।
विशेष अतिथि नोर्जिन डोल्मा ने अपने संबोधन में भारत सरकार और भारतीय जनता का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि 1959 में Dalai Lama और हजारों तिब्बतियों को शरण देने के बाद से भारत ने तिब्बती समुदाय को अपनी संस्कृति, भाषा और परंपराओं को सुरक्षित रखने के लिए एक सुरक्षित स्थान प्रदान किया है। उन्होंने कहा कि भारत आज निर्वासन में तिब्बती जीवन शैली का केंद्र बन गया है।
उन्होंने कहा कि Central Tibetan Administration तिब्बत-चीन विवाद का शांतिपूर्ण समाधान संवाद के माध्यम से निकालने के लिए प्रतिबद्ध है। साथ ही उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से तिब्बत से जुड़े मानवाधिकार मुद्दों को उठाने और तिब्बत से संबंधित कानूनों को आगे बढ़ाने का आग्रह किया।
पर्यावरणीय मुद्दों का उल्लेख करते हुए उन्होंने तिब्बती पठार को “एशिया का वाटर टावर” बताया। उन्होंने कहा कि तिब्बत से निकलने वाली कई प्रमुख नदियां दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया के एक अरब से अधिक लोगों की जीवनरेखा हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि People’s Republic of China द्वारा तिब्बत में बनाए जा रहे बड़े बांध और जल परियोजनाएं भारत सहित कई देशों के लिए पर्यावरणीय और रणनीतिक खतरा बन सकती हैं।
सम्मेलन के दौरान प्रतिभागियों ने तिब्बत की वर्तमान स्थिति, मानवाधिकारों की स्थिति, 14वें दलाई लामा के पुनर्जन्म के मुद्दे और तिब्बत के पर्यावरणीय महत्व पर विस्तार से चर्चा की।
सम्मेलन के अंतिम दिन प्रतिभागियों ने सर्वसम्मति से एक घोषणा-पत्र पारित किया, जिसमें नौ महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित कर तिब्बती लोगों के साथ एकजुटता व्यक्त की गई और तिब्बत आंदोलन को मजबूत करने के लिए जागरूकता अभियान, युवाओं की भागीदारी और राष्ट्रीय स्तर पर समन्वित प्रयासों पर जोर दिया गया।
कार्यक्रम के अंत में लोसांग गेनचेन ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत किया।