धर्मशाला, 12 मार्च: Dharamshala स्थित Tibetan Institute of Performing Arts में 8वें ऑल इंडिया तिब्बत सपोर्ट ग्रुप्स कॉन्फ्रेंस का शुभारंभ हुआ। सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को Penpa Tsering, सिक्योंग (प्रधानमंत्री) Central Tibetan Administration ने संबोधित किया।
दो दिवसीय इस सम्मेलन का आयोजन Core Group for the Tibetan Cause – India द्वारा किया गया, जबकि इसका संचालन दिल्ली स्थित India Tibet Coordination Office ने किया। सम्मेलन में देशभर से तिब्बत समर्थक संगठनों के प्रतिनिधि और सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हुए।
कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक रूप से बटर लैंप प्रज्ज्वलित कर की गई। इसके बाद तिब्बती और भारतीय शहीदों के सम्मान में एक मिनट का मौन रखा गया। उद्घाटन समारोह सुबह 9:30 बजे मुख्य अतिथि सिक्योंग पेनपा त्सेरिंग और विशेष अतिथि Dolma Gyari, मंत्री (सुरक्षा विभाग) के सान्निध्य में आयोजित हुआ।
इस अवसर पर हिमाचल प्रदेश सरकार में मंत्री Raghubir Singh Bali, राष्ट्रीय संयोजक R.K. Khrimey, Pankaj Goyal (राष्ट्रीय महासचिव, भारत तिब्बत सहयोग मंच), Jigme Jugney (नई दिल्ली स्थित दलाई लामा कार्यालय के प्रतिनिधि), Anand Kumar (राष्ट्रीय अध्यक्ष, इंडिया-तिब्बत फ्रेंडशिप सोसायटी), Arvind Nicose और Tarh Tarak सहित कई गणमान्य लोग मौजूद रहे।
कार्यक्रम में स्वागत संबोधन देते हुए आर.के. ख्रीमय ने प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए कहा कि धर्मशाला में सम्मेलन के दौरान प्रतिभागियों को Dalai Lama का आशीर्वाद प्राप्त होना अत्यंत प्रेरणादायक है। उन्होंने प्रतिभागियों से इस प्रेरणा को अपने-अपने क्षेत्रों में तिब्बत के समर्थन को मजबूत करने में उपयोग करने का आह्वान किया।
सम्मेलन को संबोधित करते हुए डोलमा ग्यारी ने तिब्बती लोकतंत्र के विकास और भारतीय जनता के निरंतर समर्थन का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि निर्वासन में रह रहे तिब्बती हर पांच वर्ष में लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत अपने नेतृत्व का चुनाव करते हैं। उन्होंने सिक्योंग पेनपा त्सेरिंग के हालिया पुनर्निर्वाचन का उल्लेख करते हुए कहा कि यह तिब्बती आंदोलन के लिए नई जिम्मेदारी और दिशा लेकर आया है।
अपने संबोधन में सिक्योंग पेनपा त्सेरिंग ने कहा कि तिब्बती नेतृत्व की दो प्रमुख जिम्मेदारियां हैं—सिनो-तिब्बत संघर्ष का समाधान और निर्वासन में रह रहे तिब्बतियों का कल्याण सुनिश्चित करना। उन्होंने बताया कि भारत में तिब्बती समुदाय 37 से अधिक स्थानों पर बसा हुआ है, जिनमें सबसे अधिक बस्तियां कर्नाटक में हैं, जबकि नेपाल में भी कई तिब्बती समुदाय रहते हैं।
उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तिब्बत के समर्थन में हुई प्रगति का उल्लेख करते हुए कहा कि अमेरिका में पारित एक कानून तिब्बत के मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत सुलझाए जाने वाले संघर्ष के रूप में मान्यता देता है और तिब्बती लोगों के आत्मनिर्णय के अधिकार का समर्थन करता है।
सिक्योंग ने दलाई लामा के भविष्य के पुनर्जन्म के मुद्दे पर कहा कि इस निर्णय का अधिकार केवल तिब्बती लोगों को है। उन्होंने स्पष्ट किया कि दलाई लामा के पुनर्जन्म की मान्यता का अधिकार केवल गदेन फोद्रांग ट्रस्ट के पास है और किसी अन्य देश को इसमें हस्तक्षेप करने का अधिकार नहीं है।
कार्यक्रम के अंत में अरविंद निकोस ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत किया। सम्मेलन में देशभर से आए 200 से अधिक प्रतिनिधियों ने भाग लिया, जिन्होंने तिब्बत के समर्थन में भारत में जमीनी स्तर के आंदोलन को मजबूत करने पर चर्चा की।