धर्मशाला, 16 मार्च। Central Tibetan Administration की कार्यकारी शाखा ने आगामी वित्त वर्ष के लिए 3,407.42 मिलियन रुपये (करीब 340.74 करोड़ रुपये) का बजट प्रस्ताव पेश किया है। यह प्रस्ताव सोमवार को Tibetan Parliament-in-Exile के 17वें कार्यकाल के 11वें सत्र के पहले दिन रखा गया। यह 13 दिवसीय सत्र 16 मार्च से 30 मार्च 2026 तक चलेगा और 17वीं संसद का अंतिम सत्र माना जा रहा है।
यह बजट प्रस्ताव Penpa Tsering ने पेश किया, जो वर्तमान में वित्त मंत्री का प्रभार भी संभाल रहे हैं। प्रस्तावित बजट पिछले वर्ष स्वीकृत 3,304.02 मिलियन रुपये की तुलना में 103.4 मिलियन रुपये अधिक है, जो लगभग 3.13 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है।
प्रस्तावित बजट के अनुसार कुल राशि का 2,255.23 मिलियन रुपये (66.19 प्रतिशत) सामाजिक क्षेत्र के कार्यक्रमों के लिए निर्धारित किया गया है। वहीं राजनीतिक गतिविधियों पर 796.69 मिलियन रुपये (23.38 प्रतिशत) और प्रशासनिक खर्चों के लिए 355.50 मिलियन रुपये (10.43 प्रतिशत) का प्रावधान किया गया है।
पिछले वित्त वर्ष में प्रशासन ने शुरू में 3,675.30 मिलियन रुपये का बजट प्रस्ताव रखा था, लेकिन अंततः संसद ने 2025-26 के लिए 3,304.02 मिलियन रुपये का बजट ही मंजूर किया। बताया गया कि United States से मिलने वाली आर्थिक सहायता बंद होने के कारण बजट में कटौती करनी पड़ी थी। चूंकि प्रशासन की लगभग 90 प्रतिशत वित्तीय व्यवस्था बाहरी सहायता पर निर्भर रहती है, इसलिए वित्तीय योजनाओं में संशोधन करना पड़ा।
सत्र के उद्घाटन के दौरान संसद के स्पीकर Khenpo Sonam Tenphel ने India की सरकार और जनता सहित विभिन्न देशों व अंतरराष्ट्रीय समर्थकों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि पिछले छह दशकों से मिले सहयोग के कारण निर्वासन में रह रहे तिब्बती समुदाय को अपनी भाषा, संस्कृति और धार्मिक परंपराओं को सुरक्षित रखने और आगे बढ़ाने में मदद मिली है।
स्पीकर ने National People's Congress में हाल ही में पारित नीतियों का भी उल्लेख किया, जिनका उद्देश्य “जातीय एकता” को बढ़ावा देना और तथाकथित सिनिसाइजेशन की नीति को आगे बढ़ाना बताया गया है। उन्होंने कहा कि इन कदमों से अल्पसंख्यक समुदायों और धार्मिक गतिविधियों पर सरकारी नियंत्रण बढ़ सकता है। इस संदर्भ में उन्होंने दुनिया भर में रहने वाले तिब्बतियों से अपनी भाषा और सांस्कृतिक पहचान को मजबूत बनाए रखने का आह्वान किया।
चल रहे इस संसदीय सत्र में मुख्य रूप से प्रशासन के बजट प्रस्ताव पर चर्चा और अनुमोदन किया जाएगा। इसके अलावा एक विशेष समिति की अंतिम रिपोर्ट पर भी विचार होगा, जिसमें तिब्बती राष्ट्रीय ध्वज और राष्ट्रीय प्रतीक के डिजाइन, रंग और मानकों को एकरूप करने संबंधी सुझाव शामिल हैं।