Hindi English Tuesday, 03 November 2026
BREAKING
• राज्यपाल ने स्नातकों से सामाजिक बदलाव और राष्ट्र निर्माण का वाहक बनने का किया आह्वान • मुख्यमंत्री ने विधायक नंद लाल के निधन पर जताया शोक • एक ही दिन दो संसदीय क्षेत्रों में भाजपा की महापदयात्रा, 20 हजार से अधिक कार्यकर्ताओं के जुटने की संभावना • मुख्यमंत्री ने चुवाड़ी में सिविल कोर्ट खोलने की घोषणा की • नशा मुक्त हिमाचल के लक्ष्य के साथ प्रदेशभर में आयोजित होगा ‘खेलो हिमाचल-चिट्टा मुक्त अभियान’ • 4 नवंबर 2026 का पंचांग: तिथि, नक्षत्र, राहुकाल और शुभ मुहूर्त • 4 नवंबर का इतिहास, प्रमुख घटनाएं, जन्म और निधन • 4 November 2026 Rashifal: आज का राशिफल, जानें 12 राशियों का भविष्यफल • कार्तिक महात्म्य कथा अध्याय 9: तुलसी जी की उत्पत्ति और महिमा का वर्णन • कार्तिक महात्म्य आठवां अध्याय: जानिए कार्तिक व्रत की उद्यापन विधि और धार्मिक महत्व

धर्म/अध्यात्म

More News

अध्याय:- 8 | कार्तिक महात्म्य आठवां अध्याय: जानिए कार्तिक व्रत की उद्यापन विधि और धार्मिक महत्व

Updated on Tuesday, November 03, 2026 05:36 AM IST

कार्तिक महात्म्य व्रत कथा के आठवें अध्याय में बताई उद्यापन की विधि, भगवान विष्णु की भक्ति और रात्रि जागरण का महत्व
ज्वालामुखी। श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर, देहरा रोड बोहन, ज्वालामुखी में आयोजित श्री कार्तिक महात्म्य व्रत कथा के आठवें अध्याय में भगवान विष्णु की प्रसन्नता के लिए कार्तिक मास के व्रत के उद्यापन की विस्तृत विधि का वर्णन किया गया। कथा में नारदजी ने राजा पृथु को कार्तिक व्रत के समापन, भगवान विष्णु की विशेष पूजा, रात्रि जागरण, ब्राह्मण भोजन, दान और दक्षिणा के धार्मिक महत्व के बारे में बताया।

नारदजी ने कहा कि कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी को व्रती को व्रत का संपूर्ण फल प्राप्त करने और भगवान विष्णु की प्रसन्नता के लिए विधिपूर्वक उद्यापन करना चाहिए। इसके लिए तुलसी के ऊपर चार द्वारों वाला सुंदर मंडप बनाया जाए। उसे फूलों, वंदनवार और चंवर से सजाया जाए। चारों द्वारों पर पुण्यशील, सुशील, जय और विजय नामक द्वारपालों की स्थापना की जाए। तुलसी की जड़ में चार रंगों से सर्वतोभद्र मंडल बनाकर उस पर पंचरत्न, नारियल और कलश स्थापित किया जाए।

कलश के ऊपर शंख, चक्र, गदा और पद्म धारण किए हुए पीतांबरधारी, लक्ष्मी सहित भगवान विष्णु की स्थापना कर विधिपूर्वक पूजा-अर्चना करनी चाहिए। इसके साथ ही इंद्र सहित अन्य लोकपालों का भी पूजन करना चाहिए। कथा में बताया गया कि द्वादशी को भगवान विष्णु जागृत हुए, त्रयोदशी को देवताओं ने उनके दर्शन किए और चतुर्दशी को उनका पूजन किया। इसी कारण चतुर्दशी को उद्यापन पूजा का विशेष महत्व बताया गया है।

नारदजी ने रात्रि जागरण की महिमा बताते हुए कहा कि व्रती को भजन-कीर्तन, मंगलगान, वाद्य यंत्रों और भगवान विष्णु के चरित्रों का पाठ करते हुए पूरी रात जागरण करना चाहिए। श्रद्धापूर्वक भगवान के सम्मुख कीर्तन करने से मनुष्य के अनेक जन्मों के पाप नष्ट हो जाते हैं। भक्ति भाव से नृत्य और कीर्तन करते हुए रात्रि जागरण करने वाले को एक हजार गोदान के बराबर पुण्य प्राप्त होता है। वहीं भगवान के सम्मुख नृत्य, संगीत और उनके चरित्रों का श्रवण करने से करोड़ों तीर्थों के समान पुण्य फल मिलता है।

कथा के अनुसार पूर्णिमा के दिन सामर्थ्य के अनुसार 30 सपत्नीक ब्राह्मणों अथवा एक श्रेष्ठ सपत्नीक ब्राह्मण को खीर सहित भोजन करवाना चाहिए। इसी दिन भगवान विष्णु ने भक्तों को वरदान दिया था और मत्स्य रूप धारण किया था। इसलिए पूर्णिमा को भगवान विष्णु के निमित्त किया गया दान, हवन और जप अक्षय फल प्रदान करने वाला माना गया है।

इसके बाद वैदिक मंत्रों के साथ तिल और खीर से हवन करने, ब्राह्मणों को सामर्थ्य के अनुसार दक्षिणा देने तथा भगवान विष्णु, अन्य देवताओं, तुलसी और कपिला गाय का पूजन करने का विधान बताया गया है। व्रत का उपदेश देने वाले गुरु और ब्राह्मणों को वस्त्र एवं आभूषण भेंट कर उनसे क्षमा प्रार्थना करनी चाहिए।

नारदजी ने बताया कि व्रती को प्रार्थना करनी चाहिए कि भगवान विष्णु सदैव प्रसन्न रहें, उसके सात जन्मों के पाप नष्ट हों, संतान दीर्घायु हो तथा सभी मनोकामनाएं पूर्ण हों। जीवन के अंत में उसे दुर्लभ विष्णुलोक की प्राप्ति हो। इसके पश्चात पूजा की सामग्री गाय सहित गुरु को अर्पित कर बंधु-बांधवों और मित्रों के साथ भोजन करना चाहिए।

कथा के समापन संदेश में नारदजी ने कहा कि विधि-विधान और श्रद्धा के साथ कार्तिक मास का व्रत तथा उद्यापन करने वाला व्यक्ति पापों से मुक्त होकर मनोवांछित फल प्राप्त करता है और अंत में विष्णुलोक को प्राप्त होता है। तीर्थयात्रा, दान और अन्य व्रतों से मिलने वाले पुण्य से भी करोड़ों गुना अधिक फल विधिपूर्वक कार्तिक मास का व्रत करने से प्राप्त होता है।

कथा में यह भी बताया गया कि जो भक्त इस कार्तिक महात्म्य को श्रद्धापूर्वक सुनता है अथवा वैष्णव भक्तों के समक्ष इसका पाठ करता है, उसे भी कार्तिक व्रत के पुण्य और पापनाशक फल की प्राप्ति होती है।

 

Have something to say? Post your comment
4 नवंबर 2026 का पंचांग: तिथि, नक्षत्र, राहुकाल और शुभ मुहूर्त

: 4 नवंबर 2026 का पंचांग: तिथि, नक्षत्र, राहुकाल और शुभ मुहूर्त

कार्तिक महात्म्य कथा अध्याय 9: तुलसी जी की उत्पत्ति और महिमा का वर्णन

अध्याय 9: : कार्तिक महात्म्य कथा अध्याय 9: तुलसी जी की उत्पत्ति और महिमा का वर्णन

आज राहु काल कब तक रहेगा व क्या है शुभ मुहूर्त आईये जानते हैं 3 नवंबर 2026 का पंचांग

आज का पंचांग : आज राहु काल कब तक रहेगा व क्या है शुभ मुहूर्त आईये जानते हैं 3 नवंबर 2026 का पंचांग

 9 नवंबर को मनाई जाएगी सोमवती अमावस्या, भगवान शिव की पूजा और पितरों के तर्पण का है विशेष महत्व

सोमवती अमावस्या : 9 नवंबर को मनाई जाएगी सोमवती अमावस्या, भगवान शिव की पूजा और पितरों के तर्पण का है विशेष महत्व

कार्तिक महात्म्य कथा के सातवें अध्याय में नारदजी ने बताए व्रत के नियम, तिथि अनुसार भोजन का भी किया वर्णन

अध्याय - 7 : कार्तिक महात्म्य कथा के सातवें अध्याय में नारदजी ने बताए व्रत के नियम, तिथि अनुसार भोजन का भी किया वर्णन

आज राहु काल कब तक रहेगा व क्या है शुभ मुहूर्त आईये जानते हैं 2 नवंबर 2026 का पंचांग

आज का पंचांग : आज राहु काल कब तक रहेगा व क्या है शुभ मुहूर्त आईये जानते हैं 2 नवंबर 2026 का पंचांग

कार्तिक महात्म्य कथा छठवां अध्याय: कार्तिक स्नान और भगवान विष्णु की पूजा विधि

अध्याय - 6 : कार्तिक महात्म्य कथा छठवां अध्याय: कार्तिक स्नान और भगवान विष्णु की पूजा विधि

आज राहु काल कब तक रहेगा व क्या है शुभ मुहूर्त आईये जानते हैं 1 नवंबर 2026 का पंचांग

आज का पंचांग : आज राहु काल कब तक रहेगा व क्या है शुभ मुहूर्त आईये जानते हैं 1 नवंबर 2026 का पंचांग

 कार्तिक महात्म्य व्रत कथा के पांचवें अध्याय में बताई गई कार्तिक स्नान, शौच और पूजन की विधि

अध्याय - 5 : कार्तिक महात्म्य व्रत कथा के पांचवें अध्याय में बताई गई कार्तिक स्नान, शौच और पूजन की विधि

आज राहु काल कब तक रहेगा व क्या है शुभ मुहूर्त आईये जानते हैं 31 अक्टूबर 2026 का पंचांग

आज का पंचांग : आज राहु काल कब तक रहेगा व क्या है शुभ मुहूर्त आईये जानते हैं 31 अक्टूबर 2026 का पंचांग

X