# 9 नवंबर को मनाई जाएगी सोमवती अमावस्या, भगवान शिव की पूजा और पितरों के तर्पण का है विशेष महत्व
**ज्वालामुखी।** हिंदू धर्म में विशेष धार्मिक महत्व रखने वाली सोमवती अमावस्या इस वर्ष 9 नवंबर 2026, सोमवार को मनाई जाएगी। सोमवार के दिन अमावस्या तिथि पड़ने के कारण इसे सोमवती अमावस्या कहा जाता है। कार्तिक मास की इस पवित्र तिथि पर स्नान, दान, पूजा-पाठ, पितरों का तर्पण और पीपल वृक्ष की पूजा का विशेष महत्व माना गया है।
पंचांग के अनुसार, अमावस्या तिथि 8 नवंबर रविवार को सुबह लगभग 11:28 बजे शुरू होगी और 9 नवंबर सोमवार को दोपहर लगभग 12:31 बजे तक रहेगी। सूर्योदय के समय अमावस्या तिथि होने के कारण 9 नवंबर को सोमवती अमावस्या का धार्मिक व्रत और पर्व मनाया जाएगा।
**भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा का विधान**
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सोमवती अमावस्या के दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा-अर्चना करने से सुख-समृद्धि और परिवार में खुशहाली आती है। इस दिन श्रद्धालु सुबह स्नान करके व्रत का संकल्प लेते हैं और भगवान शिव को जल, दूध, बेलपत्र, पुष्प तथा फल अर्पित करते हैं।
इस दिन पीपल के वृक्ष की पूजा और परिक्रमा का भी विशेष महत्व है। मान्यता है कि पीपल के वृक्ष में भगवान विष्णु सहित अनेक देवी-देवताओं का वास होता है। महिलाएं परिवार की सुख-समृद्धि और पति की दीर्घायु की कामना से पीपल की पूजा तथा परिक्रमा करती हैं।
**पितरों के तर्पण और दान-पुण्य का विशेष महत्व**
सोमवती अमावस्या को पितरों के स्मरण और उनकी आत्मिक शांति के लिए भी महत्वपूर्ण माना गया है। इस दिन श्रद्धालु अपने पूर्वजों के निमित्त तर्पण, श्राद्ध और दान-पुण्य करते हैं। जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र और अन्य आवश्यक वस्तुएं दान करने की परंपरा भी है।
धार्मिक मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और भक्ति के साथ किए गए पुण्य कर्मों से पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है तथा जीवन में सुख-शांति बनी रहती है।
सोमवती अमावस्या पर मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए जाएंगे। श्रद्धालु भगवान शिव की आराधना के साथ पितरों का स्मरण कर परिवार की सुख-शांति और समृद्धि की कामना करेंगे।