इस दिन श्रद्धालु प्रातः स्नान आदि से निवृत्त होकर भगवान विष्णु की पूजा करते हैं। भगवान को पीले पुष्प, फल, पंचामृत और तुलसी दल अर्पित करने की परंपरा है। भक्त अपनी सामर्थ्य के अनुसार निर्जल, जलाहार या फलाहार व्रत रखते हैं। दिनभर भगवान विष्णु का स्मरण, विष्णु सहस्रनाम का पाठ और भजन-कीर्तन किया जाता है।