धर्म/आस्था डेस्क: वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को मोहिनी एकादशी कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह व्रत सभी पापों को नष्ट करने वाला और अत्यंत पुण्यदायी माना गया है। इस दिन विधिपूर्वक व्रत रखने से व्यक्ति मोह-माया और पापों के बंधन से मुक्त हो जाता है।
27 अप्रैल, सोमवार को मोहिनी एकादशी का पावन व्रत रखा जाएगा। यह एकादशी वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की महत्वपूर्ण तिथि मानी जाती है और धार्मिक दृष्टि से विशेष महत्व रखती है।
पंचांग के अनुसार एकादशी तिथि 26 अप्रैल को शाम 06:06 बजे प्रारंभ होगी और 27 अप्रैल को शाम 06:15 बजे समाप्त होगी। उदयातिथि के अनुसार व्रत 27 अप्रैल को ही मान्य रहेगा, जबकि व्रत का पारण 28 अप्रैल, मंगलवार को किया जाएगा। पारण का समय सुबह 05:38 बजे से 08:17 बजे के बीच निर्धारित है।
मोहिनी एकादशी का महत्व
हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष स्थान है, लेकिन मोहिनी एकादशी को विशेष रूप से “पाप-नाशिनी” कहा गया है। मान्यता है कि इस व्रत के प्रभाव से मनुष्य के अनेक जन्मों के पाप भी समाप्त हो जाते हैं और उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है।
पौराणिक कथा
प्राचीन समय में सरस्वती नदी के तट पर भद्रावती नामक एक सुंदर नगरी थी। वहां धृतिमान नाम के सत्यप्रतिज्ञ राजा राज्य करते थे। उसी नगर में धनपाल नाम का एक धनी वैश्य रहता था, जो धर्म-कर्म में सदैव लगा रहता था।
धनपाल के पाँच पुत्र थे—सुमना, द्युतिमान, मेधावी, सुकृत और धृष्टबुद्धि। इनमें से धृष्टबुद्धि अत्यंत दुर्व्यसनी और पाप कर्मों में लिप्त था। वह जुआ, वेश्याओं और अन्य बुराइयों में डूबा रहता था और अपने पिता की संपत्ति नष्ट करता रहा।
अंततः पिता ने उसे घर से निकाल दिया। दर-दर भटकते हुए, भूख-प्यास से व्याकुल धृष्टबुद्धि महर्षि कौँडिन्य के आश्रम पहुँचा और उनसे मुक्ति का उपाय पूछा।
मुनि कौँडिन्य ने उसे वैशाख शुक्ल पक्ष की मोहिनी एकादशी का व्रत करने की सलाह दी। उन्होंने बताया कि इस व्रत से मेरु पर्वत के समान बड़े पाप भी नष्ट हो जाते हैं।
व्रत का प्रभाव
मुनि के उपदेश के अनुसार धृष्टबुद्धि ने विधिपूर्वक मोहिनी एकादशी का व्रत किया। व्रत के प्रभाव से वह पापमुक्त हो गया और अंततः दिव्य शरीर धारण कर भगवान विष्णु के धाम को प्राप्त हुआ।
क्या मिलता है इस व्रत से फल?
पापों से मुक्ति
मानसिक शांति और आध्यात्मिक उन्नति
मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग
कथा सुनने/पढ़ने से सहस्त्र गोदान के समान पुण्य