फीचर डेस्क
सनातन धर्म में एकादशी व्रतों का विशेष महत्व बताया गया है, लेकिन निर्जला एकादशी को इनमें सबसे श्रेष्ठ और कठिन माना जाता है। ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की एकादशी को आने वाला यह पर्व इस वर्ष 25 जून 2026 (गुरुवार) को मनाया जाएगा। मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से किया गया व्रत व्यक्ति को वर्ष भर की सभी एकादशियों के समान पुण्य प्रदान करता है।
आस्था और तपस्या का संगम
निर्जला एकादशी का नाम ही इसकी विशेषता को दर्शाता है। इस दिन श्रद्धालु अन्न के साथ-साथ जल का भी त्याग करते हैं। भीषण गर्मी के मौसम में बिना पानी के उपवास रखना आत्मसंयम और दृढ़ संकल्प का प्रतीक माना जाता है। यही कारण है कि यह व्रत श्रद्धालुओं की आस्था और भक्ति की कठिन परीक्षा भी माना जाता है।
भीमसेन से जुड़ी है मान्यता
पुराणों में वर्णित कथा के अनुसार पांडवों में भीमसेन भोजन के बिना नहीं रह पाते थे। सभी एकादशियों का व्रत करना उनके लिए कठिन था। तब महर्षि वेदव्यास ने उन्हें वर्ष में केवल एक बार निर्जला एकादशी का व्रत रखने का सुझाव दिया। कहा जाता है कि इस व्रत से उन्हें सभी एकादशियों का फल प्राप्त हुआ। इसी कारण इसे भीमसेनी एकादशी भी कहा जाता है।
पूजा, दान और सेवा का पर्व
निर्जला एकादशी केवल उपवास तक सीमित नहीं है। इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा-अर्चना के साथ दान-पुण्य का भी विशेष महत्व बताया गया है। श्रद्धालु जल से भरे घड़े, सत्तू, फल, वस्त्र, छाता और अन्य उपयोगी वस्तुएं दान करते हैं। यह परंपरा समाज में सेवा और परोपकार की भावना को मजबूत करती है।
आज के समय में क्यों महत्वपूर्ण है यह व्रत?
आधुनिक जीवन की व्यस्तता और तनाव के बीच निर्जला एकादशी आत्मचिंतन और आत्मनियंत्रण का अवसर प्रदान करती है। यह पर्व केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं, बल्कि संयम, अनुशासन और सकारात्मक जीवन मूल्यों का संदेश भी देता है। व्रत के माध्यम से व्यक्ति अपने मन और इंद्रियों पर नियंत्रण रखने का अभ्यास करता है।
कब है निर्जला एकादशी?
एकादशी तिथि प्रारंभ: 24 जून 2026, शाम 6:12 बजे
एकादशी तिथि समाप्त: 25 जून 2026, रात 8:09 बजे
व्रत: 25 जून 2026, गुरुवार
पारण: 26 जून 2026 को द्वादशी तिथि में
निष्कर्ष
निर्जला एकादशी भारतीय संस्कृति में श्रद्धा, तपस्या और सेवा भाव का अद्भुत संगम है। यह पर्व केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आत्मसंयम, करुणा और मानवता के मूल्यों को जीवन में अपनाने की प्रेरणा भी देता है। इसलिए हर वर्ष लाखों श्रद्धालु इस दिन भगवान विष्णु की आराधना कर सुख, समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति की कामना करते हैं।