‼️ मंगलवार, 22 सितंबर 2026 ‼️
🌹 आइए जानते हैं परिवर्तिनी एकादशी की तिथि, पूजा-विधि, व्रत कथा और धार्मिक महत्व... 🌹
🌷 शान्ताकारं भुजगशयनं पद्मनाभं सुरेशम्।
विश्वाधारं गगनसदृशं मेघवर्णं शुभाङ्गम्।।
लक्ष्मीकान्तं कमलनयनं योगिभिर्ध्यानगम्यम्।
वन्दे विष्णुं भवभयहरं सर्वलोकैकनाथम्।। 🙏
🌷 परिवर्तिनी एकादशी व्रत की तिथि
वैदिक पंचांग के अनुसार भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को परिवर्तिनी एकादशी का व्रत रखा जाता है। वर्ष 2026 में एकादशी तिथि 21 सितंबर की रात 8 बजे से शुरू होकर 22 सितंबर की रात 9:43 बजे तक रहेगी। इसलिए परिवर्तिनी एकादशी का व्रत 22 सितंबर 2026, मंगलवार को रखा जाएगा।
इस दिन श्रीहरि विष्णु की पूजा के लिए शुभ समय सुबह 9:11 बजे से दोपहर 1:45 बजे तक बताया गया है। इस अवधि में भगवान विष्णु की विधिपूर्वक पूजा-अर्चना और ध्यान किया जा सकता है।
एकादशी हिंदू धर्म के प्रमुख व्रतों में से एक है। प्रत्येक माह दो एकादशियां आती हैं—एक कृष्ण पक्ष में और दूसरी शुक्ल पक्ष में। भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को परिवर्तिनी एकादशी कहा जाता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन भगवान विष्णु के वामन अवतार की पूजा का विशेष महत्व है। इस व्रत को पापों का नाश करने वाला और पुण्य प्रदान करने वाला माना गया है।
🌷 परिवर्तिनी एकादशी व्रत कथा
धर्मराज युधिष्ठिर ने भगवान श्रीकृष्ण से पूछा—
“हे प्रभु! भाद्रपद शुक्ल पक्ष की एकादशी का क्या नाम है? इसकी विधि और महिमा कृपापूर्वक बताइए।”
भगवान श्रीकृष्ण ने कहा—
“हे युधिष्ठिर! इस एकादशी का नाम परिवर्तिनी एकादशी है। यह पापों का नाश करने वाली और अत्यंत पुण्यदायिनी है। इसे वामन एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। इसकी महिमा ध्यानपूर्वक सुनो।”
यह एकादशी पद्मा, परिवर्तिनी, जलझूलनी और जयंती एकादशी के नाम से भी जानी जाती है। धार्मिक मान्यता है कि इसका व्रत करने से वाजपेय यज्ञ के समान पुण्य फल प्राप्त होता है।
जो मनुष्य इस दिन भगवान विष्णु के वामन स्वरूप की श्रद्धापूर्वक पूजा करता है, उसे विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है। मोक्ष की कामना रखने वाले श्रद्धालुओं के लिए इस व्रत को अत्यंत फलदायी माना गया है।
कमलनयन भगवान विष्णु का कमल पुष्पों से पूजन करने वाले भक्तों पर श्रीहरि की कृपा बनी रहती है। एकादशी के दिन उपवास, पूजन, हरिनाम संकीर्तन और रात्रि जागरण का भी विशेष महत्व बताया गया है।
मान्यता है कि चातुर्मास के दौरान भगवान विष्णु क्षीरसागर में योगनिद्रा में रहते हैं और परिवर्तिनी एकादशी के दिन करवट बदलते हैं। इसी कारण इस एकादशी का नाम परिवर्तिनी एकादशी पड़ा।
🚩 भगवान वामन और राजा बलि की कथा
त्रेतायुग में राजा बलि नामक एक पराक्रमी दैत्य राजा हुआ करता था। वह भगवान विष्णु का परम भक्त था। वह नियमित रूप से यज्ञ करता, वेद मंत्रों का पाठ करता और ब्राह्मणों को भोजन कराता था। धार्मिक होने के साथ-साथ वह अत्यंत वीर और शक्तिशाली भी था।
एक समय राजा बलि ने इंद्रलोक पर अपना अधिकार स्थापित कर लिया। इससे सभी देवता चिंतित हो गए। देवगुरु बृहस्पति के साथ इंद्र सहित सभी देवता भगवान विष्णु की शरण में पहुंचे और उनसे संकट दूर करने की प्रार्थना की।
देवताओं की प्रार्थना स्वीकार करते हुए भगवान विष्णु ने वामन अवतार धारण किया और राजा बलि द्वारा आयोजित यज्ञ में पहुंचे।
भगवान वामन ने राजा बलि से दान में केवल तीन पग भूमि मांगी। राजा बलि ने उन्हें देखकर कहा कि इतने छोटे से शरीर के लिए तीन पग भूमि ही क्यों? लेकिन भगवान वामन अपनी मांग पर अडिग रहे।
राजा बलि ने तीन पग भूमि देने का वचन दे दिया। इसके बाद भगवान वामन ने विराट रूप धारण किया। अपने दो पगों में उन्होंने पृथ्वी और आकाश को नाप लिया।
अब तीसरे पग के लिए भगवान वामन ने पूछा—
“राजन! अब तीसरा पग कहां रखूं?”
राजा बलि समझ गए कि उनके सामने स्वयं भगवान विष्णु हैं। उन्होंने विनम्रतापूर्वक अपना सिर भगवान के चरणों में झुका दिया और कहा कि तीसरा पग उनके मस्तक पर रखा जाए।
भगवान वामन ने अपना चरण राजा बलि के मस्तक पर रखा और उन्हें पाताल लोक भेज दिया। राजा बलि की भक्ति, विनम्रता और समर्पण से प्रसन्न होकर भगवान ने उन्हें आश्वासन दिया कि वे सदैव उनके निकट रहेंगे।
धार्मिक मान्यता के अनुसार भाद्रपद शुक्ल पक्ष की एकादशी के दिन राजा बलि के आश्रम में भगवान वामन की मूर्ति स्थापित की गई। इसी कारण इस एकादशी का वामन भगवान से विशेष संबंध माना जाता है।
मान्यता है कि जो भक्त श्रद्धा और विधिपूर्वक परिवर्तिनी एकादशी का व्रत करते हैं, वे पापों से मुक्त होकर भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करते हैं। इस दिन व्रत, कथा श्रवण और रात्रि जागरण को भी पुण्यदायी माना गया है।
🌷 परिवर्तिनी एकादशी व्रत-विधि
परिवर्तिनी एकादशी का व्रत श्रद्धा और नियमपूर्वक करने की परंपरा है।
-
एक दिन पहले मन में व्रत का संकल्प लें।
-
एकादशी के दिन सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
-
भगवान विष्णु के वामन स्वरूप का ध्यान एवं पूजन करें।
-
भगवान को धूप, दीप, पुष्प, नैवेद्य, मिष्ठान और फल अर्पित करें।
-
संभव हो तो कमल पुष्प से भगवान विष्णु का पूजन करें।
-
अपनी सामर्थ्य के अनुसार फलाहार या उपवास रखें।
-
दिनभर हरिनाम संकीर्तन, विष्णु मंत्र जाप और प्रभु भक्ति में समय बिताएं।
-
मंदिर में दीपदान करना भी शुभ माना जाता है।
-
रात्रि में भगवान विष्णु का स्मरण एवं जागरण करें।
-
अगले दिन द्वादशी तिथि में पारण कर व्रत पूर्ण करें।
🌷 परिवर्तिनी एकादशी का महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान विष्णु को एकादशी तिथि अत्यंत प्रिय है। इस दिन उपवास, पूजा, ध्यान और हरिनाम संकीर्तन करने से भक्त को आध्यात्मिक शांति और पुण्य की प्राप्ति होती है।
परिवर्तिनी एकादशी को विशेष रूप से भगवान विष्णु के वामन अवतार से जोड़ा जाता है। मान्यता है कि इस दिन वामन भगवान की पूजा करने से भक्त को विशेष पुण्य फल प्राप्त होता है।
यह व्रत मनुष्य को संयम, भक्ति, आत्मशुद्धि और ईश्वर के प्रति समर्पण का संदेश देता है। श्रद्धा से व्रत और भगवान विष्णु का स्मरण करने से मन में सकारात्मकता आती है और जीवन में आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार होता है।
🌷 मन और शरीर की शुद्धि करें।
🌷 नकारात्मक विचारों और कर्मों से दूर रहें।
🌷 भगवान विष्णु की भक्ति को मजबूत करें।
🌷 परमात्मा के प्रति समर्पण भाव रखें और मोक्ष के मार्ग पर आगे बढ़ें।
जगत के पालनहार श्रीहरि विष्णु जी की कृपा से आप सभी के मनोरथ सिद्ध हों। आपके जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और आरोग्य बना रहे।
आप सभी का दिन शुभ एवं मंगलमय हो। 🌸🌹🙏
🙏 हरिनाम संकीर्तन
हरे कृष्ण हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण हरे हरे। 🌺
हरे राम हरे राम, राम राम हरे हरे।। 🌺
🙏🏻🌷 ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः। 🌷🙏🏻
🙏🏻🌷 ॐ परमात्मने नमः। 🌷🙏🏻
🙏🏻🌷 ॐ गणेशाय नमः। 🌷🙏🏻
🚩 जय श्रीहरि विष्णु। जय श्री वामन भगवान। 🚩