20 जुलाई का यह प्रदर्शन केवल एक विरोध मार्च नहीं रहा, बल्कि युवाओं की शिक्षा व्यवस्था, बेरोजगारी और जवाबदेही जैसे मुद्दों पर बढ़ते असंतोष का बड़ा प्रदर्शन बन गया। दिनभर चले घटनाक्रम के बाद सरकार और आंदोलनकारियों के बीच संवाद की शुरुआत जरूर हुई, लेकिन आंदोलन की प्रमुख मांगों पर अंतिम निर्णय अभी बाकी है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा संसद के भीतर और बाहर दोनों जगह राजनीतिक बहस का प्रमुख विषय बने रहने की संभावना है।