इनका नाम है सरबजीत सिंह, लेकिन लोग प्यार से बॉबी के नाम से बुलाते हैं।
न तो इसको घर पे कोई काम है और न दूकान पर। कभी एंबुलेंस लेकर मरीजों को आई जी एम सी छोड़ने जा रहा होता है तो कभी मृत लावारिस लाशो को शमशान ले जाता है। शाम को लोग /पर्यटक जब माल रोड पर घूमते हुए मौसम का आनंद ले रहे होते है ये फालतू सरदार कैंसर हस्पताल में मरीजों को खिचड़ी का लंगर लगा के खिला रहा होता है।
सवेरे सवेरे उठकर लोग सैर पे निकलते है और ये सरदार मरीजों को बिस्कुट खिला रहा होता है। रविवार को भी इसको चैन नही होता माल रोड पर ब्लड कैंप लगा कर लोगो का खून निकाल रहा होता है। ऐसा है ये फालतू इंसान।
वाहगुरु ऐसे फालतू हर शहर में भी पैदा करो जी। इंसानियत को खत्म होने से बचाते है ऐसे फालतू लोग। गरीबो के आंसू नही टपकने देते ऐसे फालतू लोग। वैसे भी आजकल कोई फालतू नही जो दुसरो के लिए थोड़ा वक़्त निकाल सके। और दुसरो के बारे में सोच सके उनकी तकलीफों को अपना सके।
ओ फालतू बॉबी !!!हर शहर में क्यों नही पैदा हुआ ? हर शहर में भी मरीज है , उन्हें कोई हाथ भी नही लगाता। वहां भी लावारिस लाशें लावारिस ही पड़ी रहती है भाई जी। वहां पर भी मरीजों को चाय बिस्कुट खिलाने वाला कोई तेरे जैसा फालतू बंदा चाहिए।
सर्वजीत सिंह ब़ॉबी को साल 1986 में स्कूल छोड़ना पड़ा था. उस समय बॉबी छठी क्लास में शिमला के सेंट एडवर्ड्स स्कूल में पढ़ते थे. 12 साल की उम्र में परिवार की वित्तीय हालात की वजह से इन्हें पढ़ाई छोड़नी पड़ी, क्योंकि तीन छोटी बहनों को पढ़ाना था, इसलिए बॉबी को खुद स्कूल छोड़ना पड़ा. सर्बजीत सिंह बॉबी शिमला में‘अलमाइटी ब्लैसिंग’ नाम से एक एनजीओ चलाते हैं, जो कि शिमला के आईजीएमसी के कैंसर अस्पताल में रोजाना फ्री लंगर लगाते हैं और इसके अलावा, लावारिश लाशों को श्मशानघाट तक पहुंचाने लिए डैड बॉडी वैन मुहैया करवाते हैं. बॉबी ने ‘अलमाइटी ब्लैसिंग’ एनजीओ की स्थापना 2014 में की थी
अल्माईटी ब्लेसिंग्स संस्था के अध्यक्ष सर्बजीत सिंह का कहना है कि वह 25 साल से समाज सेवा के क्षेत्र में हैं. पिछले 6 साल से अस्पताल में मुफ्त लंगर चला रहे हैं. उनका एक रोटी बैंक भी है, जिनमें बच्चों को भी जोड़ा गया है. मुफ्त लंगर के लिए बच्चे उन्हें 25 हजार रोटियां देते हैं. रोटियां दूर-दराज के इलाकों से भी आती है. उनका कहना है कि पूर्व सरकार की मदद से 2017 में उन्होंने कैंसर मरीजों के लिए एक रैन बसेरा बनाने का कार्य शुरू किया था,जो काफी प्रयासों और मेहनत के बाद 2019 में बनकर तैयार हुआ था