धर्मशाला/कुल्लू: हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला के धर्मकोट और कुल्लू जिले के कसोल में बड़ी संख्या में इज़राइल से आने वाले पर्यटक और लंबे समय तक रहने वाले ट्रैवलर्स देखे जाते हैं। पिछले दो दशकों में ये स्थान इज़राइली युवाओं के पसंदीदा पर्यटन स्थलों में शामिल हो गए हैं।
क्यों आते हैं इतने इज़राइली
इज़राइल में सैन्य सेवा पूरी करने के बाद कई युवा दुनिया घूमने निकलते हैं। भारत का हिमालयी क्षेत्र खासकर धर्मकोट और कसोल उन्हें शांत वातावरण, आध्यात्मिक माहौल और सस्ते रहने-खाने की सुविधाओं के कारण आकर्षित करता है।
धर्मकोट को अक्सर “मिनी इज़राइल” भी कहा जाता है क्योंकि यहां कई कैफे, गेस्ट हाउस और रेस्टोरेंट इज़राइली भोजन और हिब्रू भाषा में मेनू उपलब्ध कराते हैं।
खान-पान और कैफे संस्कृति
धर्मकोट और कसोल में कई कैफे इज़राइली भोजन के लिए प्रसिद्ध हैं। यहाँ हुमस, शाक्षुका, फलाफल, पीटा ब्रेड और इज़राइली सलाद आसानी से मिल जाते हैं।
इन कैफे में अक्सर हिब्रू भाषा के बोर्ड और मेनू दिखाई देते हैं। कई जगहों पर इज़राइली संगीत और सांस्कृतिक माहौल भी देखने को मिलता है।
स्थानीय अर्थव्यवस्था पर प्रभाव
इज़राइली पर्यटकों की वजह से इन क्षेत्रों में पर्यटन उद्योग को काफी बढ़ावा मिला है। धर्मकोट और कसोल में गेस्ट हाउस, कैफे, ट्रेकिंग गाइड, टैक्सी और अन्य पर्यटन व्यवसाय तेजी से विकसित हुए हैं।
स्थानीय लोगों को रोजगार के नए अवसर भी मिले हैं। कई स्थानीय होटल और रेस्टोरेंट अब खास तौर पर विदेशी पर्यटकों को ध्यान में रखकर सेवाएं दे रहे हैं।
संस्कृति और जीवनशैली
धर्मकोट और कसोल में रहने वाले इज़राइली पर्यटक अक्सर योग, ध्यान, ट्रेकिंग और प्रकृति के करीब रहने वाली जीवनशैली को अपनाते हैं।
पार्वती घाटी में ट्रेकिंग, कैफे में संगीत कार्यक्रम और सांस्कृतिक मेलजोल इस इलाके की खास पहचान बन चुके हैं।
प्रशासन की नजर
हालांकि पर्यटन बढ़ने से स्थानीय अर्थव्यवस्था मजबूत हुई है, लेकिन प्रशासन समय-समय पर कानून व्यवस्था, वीजा नियमों और पर्यावरण संरक्षण को लेकर भी सख्ती करता है ताकि पर्यटन संतुलित और सुरक्षित बना रहे।
निष्कर्ष
धर्मकोट और कसोल आज अंतरराष्ट्रीय पर्यटन के महत्वपूर्ण केंद्र बन चुके हैं। यहां आने वाले इज़राइली पर्यटक स्थानीय संस्कृति के साथ मिलकर एक अनोखा वैश्विक माहौल तैयार करते हैं, जो हिमाचल के पर्यटन को नई पहचान देता है।