जम्मू कश्मीर-जम्मू राष्ट्रीय राजमार्ग पर कुद नामक स्थान पर स्थित प्रेम दी हट्टी प्रेम स्वीट्स पाक परंपरा के प्रतीक के रूप में खड़ी एक मिठाई की दुकान नहीं एक ब्रांड बन चुका है, जो 100 साल की उल्लेखनीय यात्रा का स्मरण करा रहा है, प्रेम दी हट्टी की शुरुआत एक छोटी सी मिठाई की दुकान के रूप में 1925 में शुरू हुई थी, जब प्रेम लोक नाथ खजूरिया ने सुरम्य पहाड़ी शहर कुद में पहली बार दुकान की स्थापना की थी।
अपनी साधारण शुरुआत से,लेकर अब तो प्रेम दी हट्टी एक स्वादिष्ट व्यंजन स्थल में तब्दील हो गया है, और राजमार्ग के किनारे तीन दुकानें संचालित करता है और इसके अतिरिक्त उधमपुर में भी दो दुकाने हैं। यह संस्थान अब प्रतिदिन दो टन मिठाइयों का उत्पादन करता है। दुकान की खास पेशकश पतीसा, कलाकंद बर्फी और मैंगो जेली और चाॅकलेट वर्फी है —इस क्षेत्र में गुणवत्ता और प्रामाणिकता का पर्याय बन गई हैं राजमार्ग के निर्माण ने स्थानीय व्यवसायों के लिए शुरुआती चुनौतियाँ खड़ी कर दीं, जिससे कई व्यवसायों को अपना घर बदलना पड़ा। प्रेम स्वीट्स न केवल बची रही, बल्कि फलती-फूलती रही, और यात्रियों के लिए सुलभ बने रहने के लिए खुद को रणनीतिक रूप से स्थापित किया। यह लचीलापन पारंपरिक व्यंजनों और उच्च गुणवत्ता वाली सामग्रियों के प्रति अटूट प्रतिबद्धता में निहित है, जो पीढ़ियों से चली आ रही एक विचारधारा के रूप में विकसित हो चुका है।
पर्यटकों और स्थानीय लोगों, दोनों ने प्रेम स्वीट्स को सदा ही अपनी -अपनी यात्रा कथाओं में शामिल किया है। खासकर पतीसा प्रेम दी हट्टी की दूर दूर तक पहचान बन चुका है अब तो चंडीगढ़ अमृतसर, दिल्ली तक लोग बसों या कूरियर के जरिए मिठाई मंगवाते हैं ।
जुलाई 2024 में एक बड़ी चुनौती तब सामने आई जब सोशल मीडिया पर दुर्भावनापूर्ण अफवाहों के ज़रिए दुकान की प्रतिष्ठा को धूमिल करने की कोशिश की गई और मिठाइयों में मांसाहारी सामग्री होने का झूठा दावा किया गया। स्थानीय पुलिस विभाग ने तुरंत जाँच की और इन दावों का व्यापक रूप से खंडन किया, जिससे प्रेम स्वीट्स की गुणवत्ता और पारदर्शिता के प्रति दीर्घकालिक प्रतिबद्धता की पुष्टि हुई।
वर्तमान मालिक गर्व के साथ इस यात्रा को याद करते हैं, कुद में अपने दादा के सपने से लेकर जम्मू-कश्मीर में एक जाना-माना नाम बनने तक के विकास को। इस सफलता का श्रेय न केवल उनके उत्पाद को है, बल्कि पीढ़ियों की कड़ी मेहनत, समर्पण और उच्चतम मानकों को बनाए रखने की अटूट प्रतिबद्धता को भी है।
प्रेम दी हट्टी अपने शताब्दी समारोह के करीब पहुँच रहा है, और यह सिर्फ़ एक मिठाई की दुकान से कहीं बढ़कर है। यह एक सांस्कृतिक कसौटी है, कश्मीर की समृद्ध पाक विरासत का प्रमाण है, और उद्यमशीलता की भावना का प्रतीक है जो अनगिनत यात्रियों की यात्राओं को मधुर बनाती रहती है।
दुकान की स्थायी लोकप्रियता शायद एक विक्रेता के आत्मविश्वास भरे इस कथन से सबसे अच्छी तरह व्यक्त होती है: "कश्मीर आने वाला हर व्यक्ति हमारे पास इसलिए आता है क्योंकि हम उच्च गुणवत्ता वाली चीज़ें बेचते हैं।" यह सरल कथन प्रेम स्वीट्स के सार को दर्शाता है—एक ऐसी जगह जहाँ परंपरा, स्वाद और विश्वास का संगम होता है।
वर्तमान मालिक गर्व के साथ अपने महान पूर्वज द्वारा शुरू की गई इस यात्रा को याद करते हैं, याद करते हैं कुद में अपने दादा परदादा के सपने से लेकर जम्मू-कश्मीर में एक जाना-माना नाम बनने तक के विकास को। इस सफलता का श्रेय न केवल उनके उत्पाद को है, बल्कि पीढ़ियों की कड़ी मेहनत, समर्पण और उच्चतम मानकों को बनाए रखने की अटूट प्रतिबद्धता को भी जाता है।
प्रेम दी हट्टी अपने शताब्दी समारोह के करीब पहुँच रहा है, और यह सिर्फ़ एक मिठाई की दुकान से कहीं बढ़कर है। यह एक सांस्कृतिक कसौटी है, कश्मीर की समृद्ध पाक विरासत का प्रमाण है, और उद्यमशीलता की भावना का प्रतीक है जो अनगिनत यात्रियों की यात्राओं को भी मधुर बनाती रहती है
दुकान की स्थायी लोकप्रियता शायद एक विक्रेता के आत्मविश्वास भरे इस कथन से सबसे अच्छी तरह व्यक्त होती है: "कश्मीर आने वाला हर व्यक्ति हमारे पास इसलिए आता है क्योंकि हम उच्च गुणवत्ता वाली चीज़ें बेचते हैं।" प्रेम दी हट्टी पर ग्राहकों का प्रेम बरस रहा है उनकी खास मिठाई पतीसा के कारण । यह सरल कथन प्रेम स्वीट्स के सार को दर्शाता है—एक ऐसी जगह जहाँ परंपरा, स्वाद और विश्वास का संगम होता है।
प्रेम लोकनाथ खजूरिया की पांचवी पीढ़ी के वारिस नितिन खजूरिया कहते हैं कि बहुत से लोगों ने पतीसा और बेसन की काॅपी करने की कोशिश की पर सफल न हो सके ।प्रतिदिन टनों के हिसाब से बनने वाली हमारी सारी मिठाई कुद नामक मूल दुकान की वर्कशॉप में ही तैयार होती है। हमें खुशी है कि हमारे लकरदादा आशीर्वाद स्वरूप एक ऐसा हुनर सौंप गए हैं जिस के दम पर प्रेम दी हट्टी सौ के करीब लोगों को प्रत्यक्ष रूप से रोजगार दे रहा है।