भारत की रसोई का स्वर्णिम मसाला हल्दी अब वैश्विक स्तर पर सुर्खियों में है।
हल्दी (Curcuma longa) को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिला बड़ा सम्मान, 2026 का 'हर्ब ऑफ द ईयर' घोषित
नई दिल्ली - भारत की पारंपरिक रसोई का चमकदार मसाला हल्दी (वैज्ञानिक नाम: Curcuma longa) एक बार फिर वैश्विक सुर्खियों में है। इंटरनेशनल हर्ब एसोसिएशन (IHA) ने इसे 2026 का हर्ब ऑफ द ईयर घोषित किया है, जो दिसंबर 2025 में की गई घोषणा के बाद अब दुनिया भर में हल्दी की खेती, उपयोग और स्वास्थ्य लाभों पर चर्चा छाई हुई है। यह सम्मान हल्दी के औषधीय, पाककला और सजावटी गुणों को मान्यता देता है, जहां यह कम से कम दो प्रमुख श्रेणियों में उत्कृष्ट साबित हुई है।
हल्दी, जिसे आयुर्वेद में 'हरिद्रा' कहा जाता है, सदियों से सूजन कम करने, इम्यूनिटी बढ़ाने और एंटीऑक्सीडेंट गुणों के लिए जानी जाती है। इसके मुख्य घटक कर्क्यूमिन (curcumin) पर लगातार नए शोध हो रहे हैं। हालिया अध्ययनों में पाया गया है कि कर्क्यूमिन डायबिटीज और हृदय रोगों के जोखिम को कम करने में सहायक हो सकता है, ब्लड प्रेशर नियंत्रित कर सकता है, LDL कोलेस्ट्रॉल घटा सकता है और HDL को बढ़ावा दे सकता है। साथ ही जोड़ों के दर्द (ऑस्टियोआर्थराइटिस) में दवाओं के बराबर या उससे बेहतर राहत देने के प्रमाण मिले हैं।
भारत की रसोई का स्वर्णिम मसाला हल्दी (वैज्ञानिक नाम - Curcuma longa) अब वैश्विक स्तर पर सुर्खियों में है। इंटरनेशनल हर्ब एसोसिएशन ने 2026 को 'हर्ब ऑफ द ईयर' का खिताब हल्दी को प्रदान किया है। यह घोषणा दिसंबर 2025 में की गई थी और अब 2026 में दुनिया भर के बागवानों, शोधकर्ताओं और स्वास्थ्य विशेषज्ञों में हल्दी की खेती व उपयोग को लेकर जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है।
हल्दी, जिसे आयुर्वेद में 'हरिद्रा' कहा जाता है, सदियों से सूजन कम करने, इम्यूनिटी बढ़ाने और एंटीऑक्सीडेंट गुणों के लिए जानी जाती है। इसके मुख्य घटक कर्क्यूमिन (curcumin) पर लगातार नए शोध हो रहे हैं। हालिया अध्ययनों में पाया गया है कि कर्क्यूमिन डायबिटीज और हृदय रोगों के जोखिम को कम करने में सहायक हो सकता है, ब्लड प्रेशर नियंत्रित कर सकता है, LDL कोलेस्ट्रॉल घटा सकता है और HDL को बढ़ावा दे सकता है। साथ ही जोड़ों के दर्द (ऑस्टियोआर्थराइटिस) में दवाओं के बराबर या उससे बेहतर राहत देने के प्रमाण मिले हैं।
हालांकि, बाजार में मिलावट की समस्या भी सामने आई है। अमेरिकन बॉटैनिकल काउंसिल की नई रिपोर्ट के अनुसार, कुछ देशों में 25% से ज्यादा हल्दी सप्लीमेंट्स में मिलावट पाई गई है, खासकर सिंथेटिक कर्क्यूमिन या दूसरी प्रजातियों की मिलावट। विशेषज्ञों का कहना है कि शुद्ध भारतीय हल्दी अभी भी सबसे बेहतर मानी जाती है, क्योंकि दुनिया की लगभग 80% हल्दी उत्पादन भारत में होता है।इसके अलावा, हाल ही में भारत की दुर्लभ नीली हल्दी (Curcuma caesia या ब्लैक टर्मरिक) भी चर्चा में है, जिसे 'ब्लू गोल्ड' कहा जा रहा है। यह सामान्य पीली हल्दी से अलग होती है और आयुर्वेद में घाव भरने, इम्यूनिटी और विशेष उपचारों के लिए उपयोगी मानी जाती है।
मंडियों में भी हल्दी के भाव शानदार बने हुए हैं। कम आवक और मजबूत घरेलू-निर्यात मांग के कारण हाल के दिनों में हल्दी के दामों में 2% से ज्यादा की तेजी दर्ज की गई है।स्वास्थ्य विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि हल्दी का अधिकतम फायदा पाने के लिए इसे काली मिर्च के साथ लें, क्योंकि इससे कर्क्यूमिन का अवशोषण कई गुना बढ़ जाता है। रोजाना हल्दी वाला दूध, चाय या भोजन में थोड़ी मात्रा स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद साबित हो सकती है।
हालांकि, बाजार में मिलावट की समस्या भी सामने आई है। अमेरिकन बॉटैनिकल काउंसिल की नई रिपोर्ट के अनुसार, कुछ देशों में 25% से ज्यादा हल्दी सप्लीमेंट्स में मिलावट पाई गई है, खासकर सिंथेटिक कर्क्यूमिन या दूसरी प्रजातियों की मिलावट। विशेषज्ञों का कहना है कि शुद्ध भारतीय हल्दी अभी भी सबसे बेहतर मानी जाती है, क्योंकि दुनिया की लगभग 80% हल्दी उत्पादन भारत में होता है। इसके अलावा, हाल ही में भारत की दुर्लभ नीली हल्दी (Curcuma caesia या ब्लैक टर्मरिक) भी चर्चा में है, जिसे 'ब्लू गोल्ड' कहा जा रहा है।
यह सामान्य पीली हल्दी से अलग होती है और आयुर्वेद में घाव भरने, इम्यूनिटी और विशेष उपचारों के लिए उपयोगी मानी जाती है।मंडियों में भी हल्दी के भाव शानदार बने हुए हैं। कम आवक और मजबूत घरेलू-निर्यात मांग के कारण हाल के दिनों में हल्दी के दामों में 2% से ज्यादा की तेजी दर्ज की गई है।स्वास्थ्य विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि हल्दी का अधिकतम फायदा पाने के लिए इसे काली मिर्च के साथ लें, क्योंकि इससे कर्क्यूमिन का अवशोषण कई गुना बढ़ जाता है। रोजाना हल्दी वाला दूध, चाय या भोजन में थोड़ी मात्रा स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद साबित हो सकती है।