भारतीय ज्योतिष शास्त्र में पंचांग का अपना महत्व है। पंचांग के अनुसार ही हम अपने धार्मिक क्रियाकलाप करते हैं। शुभ अशुभ का ज्ञान हमें प्राप्त होता है। आइये जानते हैं, आज के पंचांग के अनुसार कब है शुभ मुहूर्त और कब तक है राहुकाल और क्या है ग्रह चाल। 10 सितंबर 2026, गुरुवार को भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि रहेगी और इसके बाद अमावस्या तिथि प्रारंभ होगी। उत्तर भारत के पंचांग के अनुसार यह दिन भाद्रपद कृष्ण चतुर्दशी तथा पितृ अमावस्या/दर्श अमावस्या की पूर्व संध्या से जुड़ा है। अलग-अलग शहरों के अनुसार तिथि और मुहूर्त के समय में कुछ मिनट का अंतर हो सकता है।
हिन्दू पंचांग के अनुसार आज भाद्रपद, कृष्ण, चतुर्दशी, गुरुवार है। सूर्य दक्षिणायन, उत्तर गोल, शरद ऋतु। शक संवत 1948 , विक्रमी संवत 2083, 10 सितंबर 2026, राहुकाल दोपहर 01 बजकर 51 मिनट से 03 बजकर 25 मिनट तक।
दैनिक पंचांग
दिन: गुरुवार
तिथि: कृष्ण पक्ष चतुर्दशी — लगभग सुबह 10:33 बजे तक, इसके बाद अमावस्या
नक्षत्र: मघा — लगभग दोपहर 2:04 बजे तक, फिर पूर्वाफाल्गुनी
योग: सिद्ध — लगभग शाम 7:17 बजे तक, इसके बाद साध्य
करण: शकुनि — चतुर्दशी समाप्ति तक, फिर चतुष्पद
पक्ष: कृष्ण पक्ष
मास: भाद्रपद
विक्रम संवत: 2083, सिद्धार्थी
शक संवत: 1948, पराभव
चंद्र राशि: सिंह
सूर्य राशि: सिंह
ऋतु: शरद
☀️ सूर्योदय-सूर्यास्त
सूर्योदय : प्रातः 06:03 बजे
सूर्यास्त : सायं 06:32 बजे
शुभ मुहूर्त
अभिजीत मुहूर्त - दोपहर 11 बजकर 53 मिनट से 12 बजकर 43 मिनट तक ।
अमृत काल - 11 बजकर 47 मिनट से 01 बजकर 18 मिनट तक ।
अशुभ मुहूर्त
राहुकाल - दोपहर 01 बजकर 51 मिनट से 03 बजकर 25 मिनट तक ।
गुलिक काल- प्रातः 09 बजकर 11 मिनट से 10 बजकर 44 मिनट तक ।
यमगंड - सुबह 06 बजकर 03 मिनट से 07 बजकर 37 मिनट तक ।
पिठोरी व्रत प्रदोष मुहूर्त : शाम 06 बजकर 32 मिनट से रात 08 बजकर 51 मिनट तक ।
🌑 अमावस्या विशेष
10 सितंबर को चतुर्दशी के बाद अमावस्या तिथि शुरू होगी, जो 11 सितंबर की सुबह तक रहेगी। 10 सितंबर की रात अमावस्या से जुड़े धार्मिक अनुष्ठानों के लिए महत्वपूर्ण मानी जा सकती है। 2026 में भाद्रपद अमावस्या/पिठोरी अमावस्या 10 सितंबर को पड़ रही है। भाद्रपद कृष्ण चतुर्दशी के बाद आने वाली अमावस्या पितरों के स्मरण, तर्पण, दान और पूजा-पाठ के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है। 10 सितंबर की शाम और रात में दीपदान, पितृ स्मरण तथा धार्मिक साधना की जा सकती है।
कोई भी शुभ समय या मुहूर्त के दौरान, राहुकाल गुलिक काल, यमगण्ड काल से बचना चाहिए क्योंकि ये समय अशुभ माना जाता है। अपने दैनिक पंचांग को रोजाना देखें और किसी भी नए काम को शुरू करने के लिए इसका पालन करें जैसे कि वैवाहिक समारोह, सामाजिक मामलों, महत्वपूर्ण कार्यक्रमों, उद्घाटन, नए व्यापार उपक्रम आदि जैसे शुभ कार्यक्रम इसके अनुसार करें।
नोट: पंचांग के समय स्थान के अनुसार बदलते हैं। ऊपर दिए गए समय मुख्यतः उत्तर भारत/दिल्ली-आधारित गणनाओं से लिए गए हैं मुहूर्त में कुछ मिनट का अंतर संभव है।