भारतीय ज्योतिष शास्त्र में पंचांग का अपना महत्व है। पंचांग के अनुसार ही हम अपने धार्मिक क्रियाकलाप करते हैं। शुभ अशुभ का ज्ञान हमें प्राप्त होता है। आइये जानते हैं, आज के पंचांग के अनुसार कब है शुभ मुहूर्त और कब तक है राहुकाल और क्या है ग्रह चाल। 5 सितंबर 2026 का पंचांग शनिवार, 5 सितंबर 2026 को भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की **नवमी तिथि** रहेगी। हिंदू धर्म में पंचांग का विशेष महत्व माना जाता है। पंचांग के माध्यम से तिथि, वार, नक्षत्र, योग, करण, सूर्योदय-सूर्यास्त और शुभ-अशुभ समय की जानकारी प्राप्त की जाती है। आइए जानते हैं 5 सितंबर 2026 का संपूर्ण दैनिक पंचांग और आज के दिन का धार्मिक महत्व।
हिन्दू पंचांग के अनुसार आज भाद्रपद, कृष्ण, नवमी, शनिवार है। सूर्य दक्षिणायन, उत्तर गोल, वर्षा ऋतु। शक संवत 1948 , विक्रमी संवत 2083, 5 सितंबर 2026, राहुकाल सुबह 09 बजकर 00 मिनट से 10 बजकर 30 मिनट तक।
5 सितंबर 2026 का पंचांग
दिन:** शनिवार
तारीख:** 5 सितंबर 2026
मास:** भाद्रपद
पक्ष:** कृष्ण पक्ष
तिथि:** नवमी तिथि रात्रि 09 बजकर 53 मिनट तक उपरांत दशमी तिथि का आरंभ।
नक्षत्र:** मृगशिरा, इसके बाद आर्द्रा
योग:** वज्र, इसके बाद सिद्धि
करण:** तैतिल, इसके बाद गर
वार:** शनिवार
चंद्र राशि:** वृषभ से मिथुन
सूर्य राशि:** सिंह
सूर्योदय और सूर्यास्त
सूर्योदय : प्रातः 06:01 बजे
सूर्यास्त : सायं 06:38 बजे
शुभ मुहूर्त
ब्रह्म मुहूर्त - सुबह में 03 बजकर 55 मिनट से सुबह 04 बजकर 41 मिनट तक ।
अभिजीत मुहूर्त - दोपहर 11 बजकर 54 मिनट से 12 बजकर 45 मिनट तक ।
अमृत काल - दोपहर 01 बजकर 17 मिनट से दोपहर 02 बजकर 46 मिनट तक।
अशुभ मुहूर्त
राहुकाल - सुबह 09 बजकर 00 मिनट से 10 बजकर 30 मिनट तक ।
गुलिक काल- सुबह 06 बजकर 00 मिनट से 07 बजकर 30 मिनट तक ।
यमगंड - दोपहर 01 बजकर 30 मिनट से 03 बजकर 00 मिनट तक ।
5 सितंबर का धार्मिक महत्व
भाद्रपद कृष्ण पक्ष की नवमी तिथि धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जाती है। शनिवार होने के कारण इस दिन **शनिदेव की पूजा**, तिल के तेल का दीपक जलाना, जरूरतमंदों की सहायता करना और सेवा कार्य करना शुभ माना जाता है। श्रद्धालु अपनी श्रद्धा के अनुसार भगवान शिव, भगवान विष्णु और अपने इष्ट देव की पूजा-अर्चना भी कर सकते हैं। शनिवार को हनुमान जी की उपासना को भी विशेष फलदायी माना जाता है।
आज क्या करें?
* शनिदेव की पूजा करें।
* हनुमान चालीसा का पाठ करें।
* जरूरतमंद व्यक्ति की सहायता करें।
* तिल या तेल का दान करें।
* घर और पूजा स्थल की स्वच्छता रखें।
* किसी भी शुभ कार्य से पहले स्थानीय पंचांग के अनुसार मुहूर्त जरूर देखें।
**नोट:** पंचांग के तिथि, नक्षत्र और मुहूर्त के समय स्थान के अनुसार बदल सकते हैं। इसलिए धर्मिक अनुष्ठान या महत्वपूर्ण शुभ कार्य के लिए अपने शहर के स्थानीय पंचांग से समय का मिलान करना उचित है।
कोई भी शुभ समय या मुहूर्त के दौरान, राहुकाल गुलिक काल, यमगण्ड काल से बचना चाहिए क्योंकि ये समय अशुभ माना जाता है। अपने दैनिक पंचांग को रोजाना देखें और किसी भी नए काम को शुरू करने के लिए इसका पालन करें जैसे कि वैवाहिक समारोह, सामाजिक मामलों, महत्वपूर्ण कार्यक्रमों, उद्घाटन, नए व्यापार उपक्रम आदि जैसे शुभ कार्यक्रम इसके अनुसार करें।