भारतीय ज्योतिष शास्त्र में पंचांग का अपना महत्व है। पंचांग के अनुसार ही हम अपने धार्मिक क्रियाकलाप करते हैं। शुभ अशुभ का ज्ञान हमें प्राप्त होता है। आइये जानते हैं, आज के पंचांग के अनुसार कब है शुभ मुहूर्त और कब तक है राहुकाल और क्या है ग्रह चाल। मंगलवार को भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि सुबह तक रहेगी और इसके बाद पंचमी तिथि शुरू होगी। धार्मिक दृष्टि से यह दिन महत्वपूर्ण है। पंचांग में दिन की तिथि, नक्षत्र, योग, करण, चंद्र राशि, सूर्योदय-सूर्यास्त और राहुकाल का विशेष महत्व माना जाता है। आइए जानते हैं 1 सितंबर 2026 का संपूर्ण पंचांग और दिन के प्रमुख शुभ-अशुभ मुहूर्त।
हिन्दू पंचांग के अनुसार आज भाद्रपद, कृष्ण, चतुर्थी, मंगलवार है। सूर्य दक्षिणायन, उत्तर गोल, वर्षा ऋतु। शक संवत 1948 , विक्रमी संवत 2083, 1 सितंबर 2026, राहुकाल दोपहर 03 बजकर 30 मिनट से शाम 05 बजकर 00 मिनट तक।
1 सितंबर 2026 का पंचांग
वार: मंगलवार
तारीख: 1 सितंबर 2026
मास: भाद्रपद
पक्ष: कृष्ण पक्ष
तिथि: चतुर्थी सुबह 07 बजकर 41 मिनट तक उपरांत पंचमी तिथि का आरंभ।
चंद्र राशि: मेष
सूर्य राशि: सिंह
नक्षत्र: अश्विनी, इसके बाद भरणी
योग: वृद्धि, इसके बाद ध्रुव
करण: बालव, कौलव, तैतिल
ऋतु: वर्षा
अयन: दक्षिणायन
विक्रम संवत: 2083
शक संवत: 1948
सूर्योदय और सूर्यास्त
सूर्योदय:5:59 बजे
सूर्यास्त: 6:39 बजे
चंद्रोदय: इस दिन रात में
चंद्रास्त: लगभग 9:49 बजे सुबह
चतुर्थी तिथि के बाद पंचमी
1 सितंबर को भाद्रपद कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि सुबह लगभग 7:41 बजे तक रहेगी। इसके बाद कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि आरंभ होगी। तिथि के समाप्त होने और शुरू होने का समय स्थान के अनुसार कुछ मिनट आगे-पीछे हो सकता है।
1 सितंबर का नक्षत्र
दिन की शुरुआत अश्विनी नक्षत्र में होगी। अश्विनी नक्षत्र के बाद भरणी नक्षत्र शुरू होगा। ज्योतिष में अश्विनी नक्षत्र को गति, आरंभ और ऊर्जा से जुड़ा नक्षत्र माना जाता है। 1 सितंबर को दिन में वृद्धि योग रहेगा। इसके बाद ध्रुव योग शुरू होगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार वृद्धि योग में किए गए शुभ कार्यों में प्रगति और विस्तार की कामना की जाती है। करण पंचांग के पांच प्रमुख अंगों में से एक है और मुहूर्त विचार में इसका विशेष महत्व माना जाता है। 1 सितंबर 2026 को चंद्रमा मेष राशि में रहेगा। चंद्र राशि का प्रभाव ज्योतिषीय दृष्टि से व्यक्ति की मानसिक स्थिति और दैनिक गतिविधियों से जोड़ा जाता है।
शुभ मुहूर्त
ब्रह्म मुहूर्त: 3:55 से 4:41 बजे
अभिजीत मुहूर्त: 11:55 से 12:46 बजे
विजय मुहूर्त: 2:27 से 3:17 बजे
गोधूलि मुहूर्त: 6:39 से 7:02 बजे
निशिता मुहूर्त: रात 11:58 से अगले दिन 12:44 बजे
अशुभ समय
राहुकाल: लगभग 3:30 से 5:00 बजे
यमगंड: लगभग 9:00 से 10:30 बजे
गुलिक काल: लगभग 12 00 से 1:30 बजे
दुर्मुहूर्त: लगभग 10:15 से 11:05 बजे
धार्मिक दृष्टि से 1 सितंबर का महत्व
भाद्रपद कृष्ण पक्ष में आने वाली तिथियों का हिंदू धर्म में विशेष महत्व माना जाता है। कृष्ण पक्ष की चतुर्थी और पंचमी पर विभिन्न क्षेत्रों में अलग-अलग धार्मिक परंपराएं और व्रत-पूजन किए जाते हैं। इसलिए स्थानीय परंपरा और परिवार की मान्यताओं के अनुसार पूजा-पाठ किया जा सकता है।
कोई भी शुभ समय या मुहूर्त के दौरान, राहुकाल गुलिक काल, यमगण्ड काल से बचना चाहिए क्योंकि ये समय अशुभ माना जाता है। अपने दैनिक पंचांग को रोजाना देखें और किसी भी नए काम को शुरू करने के लिए इसका पालन करें जैसे कि वैवाहिक समारोह, सामाजिक मामलों, महत्वपूर्ण कार्यक्रमों, उद्घाटन, नए व्यापार उपक्रम आदि जैसे शुभ कार्यक्रम इसके अनुसार करें।