भारतीय ज्योतिष शास्त्र में पंचांग का अपना महत्व है। पंचांग के अनुसार ही हम अपने धार्मिक क्रियाकलाप करते हैं। शुभ अशुभ का ज्ञान हमें प्राप्त होता है। आइये जानते हैं, आज के पंचांग के अनुसार कब है शुभ मुहूर्त और कब तक है राहुकाल और क्या है ग्रह चाल। यह पंचांग भारतीय समय (लगभग उत्तर भारत/हिमाचल क्षेत्र) के अनुसार तैयार किया गया है — पूजा, शुभ कार्य और दैनिक निर्णयों के लिए उपयोगी।
हिन्दू पंचांग के अनुसार आज गुरुवार है। शक संवत 1948 , विक्रमी संवत 2083, आज हनुमान जयंती का पर्व है। पूर्णिमा सुबह में 07 बजकर 41 मिनट पर तिथि समाप्त होगी। फिर कृष्ण प्रतिपदा , आज हनुमान जयंती का पावन पर्व मनाया जाएगा।
🪔 पंचांग का मूल विवरण
वार (Day): गुरुवार
पक्ष: शुक्ल पक्ष → इसके बाद कृष्ण पक्ष शुरू
तिथि:
पूर्णिमा – सुबह 07:41 AM तक उसके बाद कृष्ण पक्ष प्रतिपदा शुरू
माह: चैत्र
संवत: विक्रम संवत 2083
ऋतु: वसंत
अयन: उत्तरायण
👉 खास बात: आज हनुमान जयंती का पर्व भी मनाया जा रहा है, जो पूर्णिमा तिथि पर आता है।
🌙 नक्षत्र, योग और करण
नक्षत्र:
हस्त – शाम 05:38 PM तक
उसके बाद चित्रा
योग:
ध्रुव योग – दोपहर लगभग 02:19 PM तक
बाद में व्याघात योग
करण:
बव – 07:41 AM तक
बालव – 08:09 PM तक
फिर कौलव
🌅 सूर्योदय, सूर्यास्त, चंद्रमा
सूर्योदय: लगभग 06:10 – 06:22 AM
सूर्यास्त: लगभग 06:38 – 06:39 PM
चन्द्रोदय: 07:03 PM
चन्द्रास्त: 06:43 AM
चंद्र राशि: कन्या ♍
⏰ अशुभ मुहूर्त
राहुकाल: 01:59 PM – 03:32 PM
यमगंड: सुबह लगभग 06:13 – 07:45 AM
गुलिक काल: 09:16 AM – 10:48 AM
शुभ मुहूर्त
अभिजीत मुहूर्त: 11:55 AM – 12:44 PM
अमृत काल: 11:18 AM – 12:59 PM
ब्रह्म मुहूर्त: 04:36 AM – 05:24 AM
👉 इस समय पूजा, नई शुरुआत, निवेश या महत्वपूर्ण कार्य करना शुभ माना जाता है।
🔱 आज का धार्मिक महत्व
हनुमान जयंती (पूर्णिमा)
सुंदरकांड पाठ, हनुमान चालीसा, और व्रत-पूजन अत्यंत फलदायी
साहस, शक्ति और बाधा निवारण के लिए विशेष दिन
🧭 आज का सरल मार्गदर्शन
सुबह का समय पूजा और आध्यात्म के लिए उत्तम
दोपहर के बाद राहुकाल में बड़े फैसले टालें
शाम के बाद मानसिक शांति और परिवार के साथ समय बिताना शुभ
चैत्र महीने की पूर्णिमा तिथि को हनुमान के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पवनपुत्र हनुमान का जन्म सूर्योदय के समय हुआ था, इसलिए मंदिरों में भोर के समय ही विशेष पूजन और आध्यात्मिक अनुष्ठान शुरू हो जाते हैं। उत्तर भारत में चैत्र पूर्णिमा पर हनुमान जयंती का पर्व अत्यंत लोकप्रिय है। देश के अलग-अलग हिस्सों में इसे विभिन्न समय और परंपराओं के साथ मनाया जाता है।
कोई भी शुभ समय या मुहूर्त के दौरान, राहुकाल गुलिक काल, यमगण्ड काल से बचना चाहिए क्योंकि ये समय अशुभ माना जाता है। अपने दैनिक पंचांग को रोजाना देखें और किसी भी नए काम को शुरू करने के लिए इसका पालन करें जैसे कि वैवाहिक समारोह, सामाजिक मामलों, महत्वपूर्ण कार्यक्रमों, उद्घाटन, नए व्यापार उपक्रम आदि जैसे शुभ कार्यक्रम इसके अनुसार करें।