15 मार्च 2026 को पड़ने वाली पापमोचनी एकादशी का व्रत भगवान विष्णु को समर्पित माना जाता है। मान्यता है कि इस एकादशी का व्रत करने से पापों से मुक्ति मिलती है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। पापमोचनी एकादशी का व्रत 15 मार्च (रविवार) को रखा जाएगा। यह चैत्र कृष्ण पक्ष की एकादशी है जो जाने-अनजाने में किए गए पापों से मुक्ति और सुख-समृद्धि के लिए भगवान विष्णु को समर्पित है। यह व्रत व्रती को मानसिक शांति, पापों का नाश और सौभाग्य प्रदान करता है।
तिथि: चैत्र कृष्ण पक्ष की एकादशी।
व्रत तिथि: 15 मार्च 2026 (रविवार)।
एकादशी तिथि प्रारंभ: 14 मार्च 2026 सुबह 08:15 बजे।
एकादशी तिथि समापन: 15 मार्च 2026 सुबह 09:16 बजे।
पारण का समय: 16 मार्च सुबह।
पापमोचिनी एकादशी व्रत की विधि
पापमोचिनी एकादशी व्रत को करने के लिए साधक को इस पावन तिथि पर सुबह सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करना चाहिए. यदि संभव हो तो गंगा नदी जैसे पवित्र जल तीर्थ पर जाकर स्नान करें. इसके बाद सूर्य देवता को अर्घ्य दें और फिर भगवान भगवान विष्णु का ध्यान करते हुए पापमोचिनी एकादशी व्रत को नियमपूर्वक करने का संकल्प लें. इसके पश्चात अपने घर के मंदिर या किसी देवालय पर जाकर भगवान विष्णु की गंगाजल, फूल-फल, रोली-चंदन, हल्दी, धूप-दीप, मिष्ठान आदि अर्पित करते हुए पूजा करें. पापमोचिनी एकादशी व्रत की पूजा में इसकी पावन कथा और पूजा के अंत में भगवान विष्णु की आरती अवश्य करें. इसी तरह इस व्रत का पूरा फल पाने के लिए अगले दिन शुभ मुहूर्त में पारण करें.
हिंदू मान्यता के अनुसार पापमोचिनी एकादशी अपने नाम के अनुरूप फल प्रदान करने वाली है. ऐसे में साधक को अपने जाने-अनजाने किए गये पापों से मुक्ति और सुख-सौभाग्य को पाने के लिए इस व्रत को पूरी श्रद्धा और विधि-विधान के साथ करना चाहिए. मान्यता है कि जो व्यक्ति पूरी निष्ठा और नियम के साथ इस व्रत को करता है, उस पर पूरे साल भगवान विष्णु की कृपा बरसती है. जिसके चलते वह सभी प्रकार के रोग-शोक और पाप से मुक्त रहता है. पापमोचिनी एकादशी व्रत के पुण्यफल से साधक को मोक्ष की प्राप्ति होती है.
एकादशी व्रत की विधि
प्रातः स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनें।
घर के मंदिर में भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करें।
भगवान को पीले फूल, तुलसी दल, फल और पंचामृत अर्पित करें।
“ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जप करें।
पूरे दिन फलाहार या निर्जल व्रत रखा जा सकता है (श्रद्धा अनुसार)।
रात में भगवान विष्णु का भजन-कीर्तन करना शुभ माना जाता है।
व्रत पारण (व्रत खोलना)
एकादशी के अगले दिन द्वादशी तिथि में सुबह स्नान और पूजा के बाद व्रत का पारण किया जाता है।
पारण से पहले ब्राह्मण या जरूरतमंद को दान देना शुभ माना जाता है।
✅ क्या करें:
विष्णु सहस्रनाम का पाठ
तुलसी पूजन
दान-पुण्य
❌ क्या न करें:
चावल और अनाज का सेवन
क्रोध, झूठ और नकारात्मक व्यवहार
मान्यता है कि पापमोचनी एकादशी का व्रत करने से व्यक्ति के पापों का नाश होता है और भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है।