14 अक्टूबर 2026 का पंचांग
भारतीय ज्योतिष शास्त्र में पंचांग का अपना महत्व है। पंचांग के अनुसार ही हम अपने धार्मिक क्रियाकलाप करते हैं। शुभ अशुभ का ज्ञान हमें प्राप्त होता है। आइये जानते हैं, आज के पंचांग के अनुसार कब है शुभ मुहूर्त और कब तक है राहुकाल और क्या है ग्रह चाल। बुधवार, 14 अक्टूबर 2026 को आश्विन शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि है। नवरात्र के चौथे दिन मां दुर्गा के चतुर्थ स्वरूप मां कूष्मांडा की पूजा-अर्चना की जाती है। बुधवार होने के कारण भगवान गणेश की आराधना का भी विशेष महत्व है।
हिन्दू पंचांग के अनुसार आज आश्विन, शुक्ल, चतुर्थी, बुधवार है। सूर्य दक्षिणायन, उत्तर गोल, शरद ऋतु। शक संवत 1948 , विक्रमी संवत 2083, 14 अक्टूबर 2026 , राहुकाल दोपहर 12 बजकर 00 मिनट से 01 बजकर 30 मिनट तक। चतुर्थी तिथि अगले दिन तड़के 01 बजकर 13 मिनट (15 अक्टूबर) तक उपरांत पंचमी तिथि का आरंभ।
पंचांग विवरण
तिथि: आश्विन शुक्ल चतुर्थी अगले दिन तड़के 01 बजकर 13 मिनट (15 अक्टूबर) तक उपरांत पंचमी तिथि का आरंभ।
वार: बुधवार
विक्रम संवत: 2083
मास: आश्विन
पक्ष: शुक्ल पक्ष
नक्षत्र: अनुराधा
योग: आयुष्मान
करण: वणिज, इसके बाद विष्टि
चंद्र राशि: वृश्चिक
ऋतु: शरद
सूर्योदय और सूर्यास्त
सूर्योदय - प्रातः 06:21 बजे
सूर्यास्त - सायं 05:53 बजे
शुभ मुहूर्त
ब्रह्म मुहूर्त -
अभिजीत मुहूर्त - कोई नहीं।
अमृत काल - सायं 04 बजकर 38 मिनट से सायं 06 बजकर 23 मिनट तक ।
अशुभ मुहूर्त
राहुकाल - दोपहर 12 बजकर 00 मिनट से 01 बजकर 30 मिनट तक ।
गुलिक काल- सुबह 10 बजकर 30 मिनट से दोपहर 12 बजकर 00 मिनट तक ।
यमगंड - सुबह 07 बजकर 30 मिनट से 09 बजकर 00 मिनट तक ।
समय स्थानीय सूर्योदय के अनुसार अलग हो सकता है।
आज का धार्मिक महत्व
- नवरात्र का चौथा दिन मां कूष्मांडा को समर्पित है।
- शुक्ल चतुर्थी पर भगवान गणेश की पूजा करना शुभ माना जाता है।
- बुधवार को गणेश जी की पूजा, मंत्र जाप और जरूरतमंदों को दान करने की परंपरा है।
आज का संदेश: श्रद्धा, सकारात्मक सोच और संयम के साथ दिन की शुरुआत करें।
- नवरात्र के चौथे दिन मां कूष्मांडा की पूजा करने से सुख, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा की प्राप्ति की मान्यता है। बुधवार को भगवान गणेश को दूर्वा अर्पित करना और मंत्र जाप करना भी शुभ माना जाता है।
मंत्र: ॐ देवी कूष्माण्डायै नमः।
आज का संदेश: श्रद्धा, धैर्य और सकारात्मक विचारों के साथ अपने दिन की शुरुआत करें।
- कोई भी शुभ समय या मुहूर्त के दौरान, राहुकाल गुलिक काल, यमगण्ड काल से बचना चाहिए क्योंकि ये समय अशुभ माना जाता है। अपने दैनिक पंचांग को रोजाना देखें और किसी भी नए काम को शुरू करने के लिए इसका पालन करें जैसे कि वैवाहिक समारोह, सामाजिक मामलों, महत्वपूर्ण कार्यक्रमों, उद्घाटन, नए व्यापार उपक्रम आदि जैसे शुभ कार्यक्रम इसके अनुसार करें।