राज्यपाल ने महाराजा अग्रसेन से जुड़े ‘एक ईंट, एक रुपया’ के सिद्धांत पर बल देते हुए कहा कि यह सामूहिक योगदान की भावना का प्रतीक है, जिसके तहत प्रत्येक व्यक्ति अपनी सामर्थ्य के अनुसार दूसरों की सहायता करता है और यह सिद्धांत आज भी उतना ही प्रासंगिक है। जरूरतमंद विद्यार्थियों को शिक्षा में सहयोग, गरीबों के उपचार में सहायता, युवाओं के लिए कौशल विकास एवं रोजगार के अवसर सृजित करना तथा जरूरतमंद परिवारों को सहयोग देना इसी भावना के उदाहरण हैं।