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शिमला | 26 साल बाद हिमाचल में फिर लॉटरी शुरू करने पर उतारू सुक्खू सरकार, चंद करोड़ की कमाई के लिए 70 लाख लोगों के भविष्य से खिलवाड़ स्वीकार नहीं : डॉ. राजीव बिंदल

Updated on Friday, August 28, 2026 16:38 PM IST

लॉटरी की बुरी लत और जुए की मानसिकता की ओर प्रदेश को धकेलना अन्याय, शोषण और जनता के साथ धोखा; किसी भी सूरत में लागू न हो निर्णय : डॉ. बिंदल

शिमला। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल ने हिमाचल प्रदेश में लॉटरी दोबारा शुरू करने की प्रदेश सरकार की तैयारी का कड़ा विरोध करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू की सरकार लगभग 26 वर्ष बाद प्रदेश में फिर से लॉटरी व्यवस्था शुरू करने जा रही है। उन्होंने कहा कि जिन गंभीर सामाजिक दुष्परिणामों को देखते हुए हिमाचल में लॉटरी बंद की गई थी, सरकार को यह बताना चाहिए कि आज ऐसी कौन-सी परिस्थितियां पैदा हो गई हैं कि उसी व्यवस्था को वापस लाने की तैयारी की जा रही है।

डॉ. बिंदल ने कहा कि लॉटरी केवल राजस्व अर्जित करने का माध्यम नहीं है, बल्कि इसका समाज और विशेष रूप से युवा पीढ़ी की मानसिकता पर पड़ने वाला प्रभाव भी देखा जाना चाहिए। जब स्कूल से निकलने वाला कोई बच्चा लॉटरी के स्टॉल और उसके प्रचार को देखता है तो उसके मन में बिना परिश्रम के अचानक धनवान बनने की इच्छा पैदा हो सकती है। यही मानसिकता धीरे-धीरे व्यक्ति को मेहनत और सही मार्ग से हटाकर गलत दिशा में ले जा सकती है।

उन्होंने कहा कि जल्दी और आसानी से पैसा कमाने की लालसा किसी भी आयु वर्ग के व्यक्ति को प्रभावित कर सकती है। इसी सामाजिक खतरे और लॉटरी के दुष्परिणामों को समझते हुए करीब 26 वर्ष पहले तत्कालीन मुख्यमंत्री प्रो. प्रेम कुमार धूमल की सरकार ने पूरे विवेक के साथ प्रदेश में लॉटरी व्यवस्था को बंद करने का निर्णय लिया था।

डॉ. बिंदल ने मुख्यमंत्री से सवाल किया कि “26 साल बाद मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने ऐसा क्या देख लिया कि उनकी सरकार हिमाचल में लॉटरी दोबारा शुरू करने पर उतारू हो गई है?”

उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार यदि केवल कुछ करोड़ रुपये का राजस्व जुटाने के लिए इस व्यवस्था को वापस ला रही है तो यह बेहद चिंताजनक है। सरकार की आर्थिक नीतियों की विफलता का बोझ प्रदेश की जनता पर इस प्रकार नहीं डाला जा सकता।

डॉ. बिंदल ने कहा, “मात्र कुछ करोड़ रुपये की आमदनी के लिए प्रदेश के लगभग 70 लाख लोगों के सामाजिक जीवन को प्रभावित करना किसी भी दृष्टि से उचित नहीं है। हिमाचल एक शिक्षित, मेहनतकश और विकासशील समाज है। ऐसे समाज को लॉटरी, जुए और आसानी से पैसा कमाने की बुरी लत की तरफ धकेलना अन्याय है, शोषण है, प्रदेश की जनता के साथ धोखा है और पाप है।”

उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार को राजस्व बढ़ाने के लिए उद्योग, पर्यटन, रोजगार, निवेश और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने की दिशा में काम करना चाहिए। सरकार अपनी आर्थिक नाकामियों की भरपाई लॉटरी के टिकट बेचकर करने का रास्ता न अपनाए।

डॉ. बिंदल ने प्रदेश सरकार को चेताते हुए कहा कि हिमाचल प्रदेश में लॉटरी किसी भी सूरत में दोबारा शुरू नहीं की जानी चाहिए। सरकार को इस निर्णय पर पुनर्विचार करते हुए इसे तत्काल वापस लेना चाहिए।

उन्होंने कहा कि सरकार को इससे कुछ करोड़ रुपये की आमदनी भले हो जाए, लेकिन इसके सामाजिक दुष्परिणाम कहीं अधिक गंभीर हो सकते हैं। सरकार का दायित्व केवल अपना खजाना भरना नहीं, बल्कि प्रदेश की जनता और आने वाली पीढ़ियों के हितों की रक्षा करना भी है।

डॉ. बिंदल ने स्पष्ट किया कि भारतीय जनता पार्टी हिमाचल प्रदेश सरकार के लॉटरी शुरू करने के निर्णय के पूरी तरह खिलाफ है और इसका पुरजोर विरोध करेगी।

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