उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने आज महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय, रोहतक में आयोजित 18वें दीक्षांत समारोह में शोधार्थियों को पीएचडी की उपाधि से अलंकृत किया और उन्हें जीवन में सफल होने तथा बुजुर्गों की सेवा व देश के प्रति सम्मान भाव रखते हुए कार्य करने के लिए प्रेरित किया।
उन्होंने कहा कि आज के दीक्षांत समारोह में 1216 शोधार्थियों को पीएचडी उपाधि प्रदान की गई है और यह गर्व की बात है कि इनमें से 740 लड़कियां हैं, जोकि देश व हरियाणा में बदलाव के गौरवान्वित परिदृश्य को दर्शाता है कि किस प्रकार लड़कियां हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं।
अपने सम्बोधन के दौरान उपराष्ट्रपति श्री धनखड़ ने कहा कि भारतीयता हमारी पहचान है, भारत का हित सर्वोपरि है! हमने जो विरासत पाई है, दुनिया के किसी देश ने ऐसी विरासत नहीं पाई है, हमने जो अप्रत्याशित प्रगति हाल के वर्षों में की है, दुनिया उससे अचंभित है!दुनिया में भारत की बढ़ती शाख को का जिक्र करते हुए उपराष्ट्रपति आईएमएफ और विश्व बैंक के अनुसार, भारत निवेश और अवसर का सबसे पसंदीदा स्थान है।
डिग्री प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा गुरुजनों का आदर, परिजनों की सेवा और देश का सम्मान आपकी प्राथमिकता होनी चाहिए। हम उस भारत के नागरिक हैं जहाँ बुज़ुर्गों का सम्मान होता है।कोई भी परिस्थिति हो, अपने माता-पिता का हमेशा ध्यान रखें। उनकी सेवा में ही ईश्वर है।
उपराष्ट्रपति ने डिग्री प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि आप सचमुच भाग्यशाली हैं कि आप स्वयं को 'अमृत काल' के पारितंत्र में हैं! 'अमृत काल' ही हमारा 'गौरव काल' है। अब आपकी असीम ऊर्जा को उजागर करने और आपकी प्रतिभा और क्षमता को पूरी तरह से साकार करने के दरवाजे खुले हैं।
उपराष्ट्रपति ने कहा देश के युवा नए भारत के अगुआ हैं, इस देश में युवा दिमागों की उपलब्धियाँ असाधारण हैं, युवाओं ने भारत को दुनिया की 5वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने में मदद की है। उन्होंने एक ऐसा पारितंत्र बनाया है जो हमें 2030 के अंत तक तीसरी सबसे बड़ी वैश्विक अर्थव्यवस्था बना देगा। हमारे युवाओं ने कृषि क्षेत्र में क्रांति ला दी है, और देश में दुनिया में तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप पारितंत्र बनाया है, उन्होने आगे कहा कि उनका योगदान ऐसा है कि भारत@2047 एक विकसित राष्ट्र होगा। भारत विश्वगुरु बनेगा; इसके बारे में कोई संदेह नहीं है!