धर्मशाला/शिमला: हिमाचल प्रदेश से राज्यसभा के लिए कांग्रेस उम्मीदवार बनाए गए Anurag Sharma इन दिनों संपत्ति और सरकारी ठेकों को लेकर उठे विवाद के कारण राजनीतिक चर्चा के केंद्र में आ गए हैं। विपक्ष ने उनके व्यवसाय और हाल के वर्षों में मिले सरकारी ठेकों को लेकर सवाल खड़े किए हैं, जबकि कांग्रेस और स्वयं अनुराग शर्मा ने इन आरोपों को निराधार बताया है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अनुराग शर्मा पेशे से ठेकेदार हैं और उनकी फर्म को पिछले दो वर्षों के दौरान कांगड़ा क्षेत्र में लोक निर्माण विभाग (PWD) के कई प्रोजेक्ट मिले। रिपोर्टों में दावा किया गया है कि इन ठेकों की कुल राशि लगभग 16 करोड़ रुपये के आसपास बताई जा रही है। इसी को लेकर विपक्षी दलों ने आरोप लगाया है कि सत्ता से नजदीकी के कारण उन्हें सरकारी कामों में फायदा मिला।
हालांकि अनुराग शर्मा ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि उनका ठेकेदारी का व्यवसाय नया नहीं है। उन्होंने कहा कि वे वर्ष 2003 से इस क्षेत्र में काम कर रहे हैं और उनके परिवार का भी लंबे समय से यही व्यवसाय रहा है। शर्मा का कहना है कि जो भी ठेके उनकी फर्म को मिले हैं, वे पूरी तरह से खुले टेंडर और नियमों के अनुसार प्राप्त हुए हैं।
इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री Sukhvinder Singh Sukhu के करीबी सूत्रों ने भी स्पष्ट किया कि ठेकेदारी करना कोई गैरकानूनी कार्य नहीं है और यदि किसी व्यक्ति ने अपने हलफनामे में सभी जानकारी पारदर्शी रूप से घोषित की है, तो उसे विवाद का विषय बनाना उचित नहीं है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राज्यसभा चुनाव के संदर्भ में यह मुद्दा इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि कांग्रेस ने अनुराग शर्मा को उम्मीदवार बनाकर कई राजनीतिक हलकों को चौंका दिया था। वे कांगड़ा जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष के रूप में सक्रिय रहे हैं और पार्टी संगठन में लंबे समय से जुड़े हुए हैं।
वहीं विपक्ष का कहना है कि राज्यसभा जैसे महत्वपूर्ण पद के लिए उम्मीदवार की पृष्ठभूमि पूरी तरह स्पष्ट होनी चाहिए। भाजपा नेताओं का आरोप है कि सरकार को इस मामले में पूरी पारदर्शिता बरतनी चाहिए।
फिलहाल यह विवाद राजनीतिक बयानबाजी तक ही सीमित है और किसी भी जांच एजेंसी की ओर से कोई आधिकारिक जांच शुरू होने की जानकारी सामने नहीं आई है। लेकिन राज्यसभा चुनाव के दौरान यह मुद्दा हिमाचल की राजनीति में बहस का विषय बन गया है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में यह मामला और गर्मा सकता है, खासकर तब जब विपक्ष इसे विधानसभा और लोकसभा चुनाव की राजनीति से जोड़कर उठाएगा।