ज्वालामुखी, 2 फरवरी 2026 — हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में स्थित ऐतिहासिक श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर, बोहण (ज्वालामुखी) हाल के दिनों में भक्ति और आध्यात्मिक उत्साह का प्रमुख केंद्र बन गया है। यह 120 वर्ष पुराना मंदिर, जो भगवान विष्णु (नारायण) और माता लक्ष्मी को समर्पित है, भक्तों के बीच विशेष आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।
मंदिर का निर्माण 1895 में बाबा द्वारकादास बैरागी ने करवाया था, जिनका जन्म ज्वालामुखी के निकट गरली गांव में हुआ था। गरली के सूद समुदाय के सहयोग से न केवल यह भव्य मंदिर बना, बल्कि इसके साथ बाबा द्वारकादास धर्मशाला भी स्थापित की गई, जो ज्वालामुखी देवी मंदिर जाने वाले यात्रियों के लिए विश्राम स्थल का काम करती है। मंदिर में जोधपुर (राजस्थान) से लाई गई श्वेत मार्बल से बनी जीवन-पर्यंत मूर्तियां स्थापित हैं, जो अपनी दिव्यता और शिल्पकला से हर दर्शनार्थी को मंत्रमुग्ध कर देती हैं।
हाल ही में मंदिर में विभिन्न पर्वों पर नियमित भजन-कीर्तन का आयोजन हो रहा है, जिससे स्थानीय भक्तों में भारी उत्साह देखने को मिल रहा है। सफला एकादशी (दिसंबर 2025), जया एकादशी (जनवरी 2026), बसंत पंचमी और मकर संक्रांति जैसे अवसरों पर कीर्तन सभाओं में सैकड़ों श्रद्धालु शामिल हुए। हाल ही में जया एकादशी के अवसर पर 29 जनवरी को दोपहर 2 बजे से आयोजित कीर्तन में भक्तों ने श्री हरि लक्ष्मी नारायण के गुणगान में डूबकर भक्ति रस लिया।
स्थानीय भक्त और पत्रकार बिजेंद्र शर्मा, जो मंदिर की गतिविधियों को सोशल मीडिया पर सक्रियता से साझा करते हैं, ने बताया कि ऐसे आयोजन न केवल आध्यात्मिक शांति प्रदान करते हैं, बल्कि समुदाय को एकजुट भी रखते हैं। चंबा से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए यह मंदिर ज्वालामुखी देवी दर्शन के रास्ते में एक शांतिपूर्ण पड़ाव बन गया है।
मंदिर प्रशासन ने आगामी एकादशियों और अन्य त्योहारों पर कीर्तन का कार्यक्रम जारी रखने की जानकारी दी है। भक्तों से अपील की गई है कि वे समय पर पहुंचकर भगवान के दर्शन और भजन में भाग लें।
जय श्री लक्ष्मी नारायण!
यह मंदिर न केवल धार्मिक महत्व रखता है, बल्कि हिमाचल की सांस्कृतिक धरोहर का भी प्रतीक है, जहां भक्ति और इतिहास का सुंदर संगम देखने को मिलता है।