हिंदू पंचांग के मुताबिक, 1 फरवरी को ही माघ पूर्णिमा का स्नान और दान किया जाएगा. दरअसल, 1 फरवरी को पूर्णिमा तिथि सुबह 5 बजकर 52 मिनट से शुरू होकर अगले दिन 2 फरवरी को सुबह 3 बजकर 38 मिनट पर समाप्त होगी. माघ पूर्णिमा पर चंद्रोदय का समय शाम 5 बजकर 23 मिनट रहेगा
शास्त्रों के अनुसार, प्रदोष काल में पूर्णिमा तिथि पर पड़ने पर पूर्णिमा का व्रत रखा जाता है। ऐसे में 1 फरवरी के दिन ही माघ पूर्णिमा का व्रत स्नान दान आदि कार्य किए जाएंगे। वहीं, इस दिन रविवार का दिन होने और पुष्य नक्षत्र के चलते रवि पुष्य योग का संयोग भी बन रहा है।
शास्त्रों के अनुसार, पूर्णिमा के दिन स्नान और दान करने का सबसे शुभ समय ब्रह्म मुहूर्त होता है. इस दिन ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5 बजकर 24 मिनट से शुरू होकर सुबह 6 बजकर 17 मिनट तक रहेगा. हालांकि, इसके बाद भी स्नान किया जा सकता है लेकिन, ब्रह्म मुहूर्त के बाद के सभी स्नान को राक्षस स्नान कहा जाता है
इस बार माघ पूर्णिमा बहुत ही शुभ मानी जा रही है क्योंकि इस दिन कई सारे शुभ संयोगों का निर्माण होने जा रहा है. जिसमें रविवार के दिन का संयोग, चतुर्ग्रही योग, शुक्र उदय, सर्वार्थसिद्धि योग, प्रीति योग, आयुष्मान योग, पुष्य नक्षत्र और रवि पु्ष्य योग जैसे शुभ योगों का निर्माण होने जा रहा है.
हिंदू धर्म में इस पूर्णिमा को बहुत ही विशेष माना जाता है क्योंकि इस दिन श्रीहरि की पूजा को अत्यधिक शुभ माना गया है. जिसके चलते इस दिन पवित्र नदियों मे स्नान व दान किया जाता है तभी पापों से मुक्ति का पुण्यदायी फल प्राप्त होता है. मान्यतानुसार, इस पूर्णिमा के दिन अगर भगवान विष्णु की पूरी श्रद्धा के साथ उपासना की जाए तो जीवन के सभी कष्टों से छुटकारा मिल जाता है