पुत्रदा एकादशी साल 2025 की अंतिम एकादशी है। ऐसी मान्यता है कि यह व्रत संतान की सुख समृद्धि और संतान की प्राप्ति के लिए रखा जाता है। विवाहित जातकों के लिए इस एकादशी का विशेष महत्व है। पुत्रदा एकादशी 30 दिसंबर को सुबह में 6 बजकर 38 मिनट पर एकादशी तिथि का आरंभ होगा।
अगले दिन 31 दिसंबर को 4 बजकर 48 मिनट पर समाप्त हो जाएगा। ऐसे में उदय काल के अनुसार, पुत्रदा एकादशी का व्रत 30 दिसंबर को रखा जाएगा। शास्त्रों के अनुसार, उदयकाल में एकादशी तिथि होने पर ही एकादशी का व्रत करना सर्वोत्तम माना जाता है।
पुत्रदा एकादशी का व्रत संतान की कामना के लिए रखा जाता है। जिन लोगों को संतान प्राप्ति में बाधा आ रही हैं उन लोगों को पुत्रदा एकादशी का व्रत जरूर रखना चाहिए। वहीं, जिन लोगों को संतान है उन्हें संतान के अच्छे स्वास्थ्य खुशहाली और समृद्धि के लिए इस व्रत को करना चाहिए। इतना ही नहीं इस व्रत को करने से धन धान्य और आरोग्य की प्राप्ति होती है। साथ ही व्यक्ति की सारी इच्छाएं भी पूर्ण होती हैं।