हिमाचल कांग्रेस को मिले नये सरदार विनय कुमार
आखिर एक वर्ष से अधिक की माथापच्ची के बाद कांग्रेस हाईकमान ने रेणुका के विधायक और विधानसभा के डिप्टी स्पीकर रहे विनय कुमार को हिमाचल प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नियुक्त कर दिया है। यह नियुक्ति पूरी तरह कांग्रेस का आंतरिक मामला है। निश्चित तौर पर राजनीति मे निर्णय राजनीतिक दृष्टिकोण से किए जाते है।
मेरी समझ मे विनय कुमार के पक्ष मे सबसे बड़ी बात उनका अनुसूचित जाति से संबंधित होना था। काबिलेगौर है कि हिमाचल मे अनुसूचित वर्ग की 25% आबादी है और उनका बड़ा वोट बैंक है, फिर विनय कुमार उस परिवार से आते है जिसका जिला सिरमौर के रेणुका चुनाव क्षेत्र पर लम्बे समय तक कब्जा रहा है।
याद रहे विनय कुमार के पिता डाक्टर प्रेम सिंह पांच बार इस क्षेत्र के विधायक रहे और विनय कुमार अब तीसरी बार रेणुका का प्रतिनिधित्व कर रहे है। वह और उनके पिता डाक्टर प्रेम सिंह हमेशा कांग्रेस के प्रति वफ़ादार रहे और यह परिवार स्वर्गीय वीरभद्र सिंह जी का नजदीकी माना जाता रहा है, लेकिन विनय कुमार वर्तमान मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुख्खू का विश्वास अर्जित करने और उनके साथ तालमेल बैठने मे भी सफल रहे है। उनकी नियुक्ति मे इतना समय लगना मेरे ब्लॉग को समझ नही आ रहा है।
यह बात ध्यान देने योग्य है कि पिछले लगभग एक वर्ष से ही नये अध्यक्ष के मनोनयन की चर्चा थी। कभी किसी का तो कभी किसी का नाम मीडिया मे आता था। कभी किसी मंत्री का, कभी किसी विधायक का, कभी वरिष्ठ नेता और कभी महिला नेत्री का। इसके लिए दर्जनो बैठके दिल्ली हाईकमान के साथ हुई।
मुख्यमंत्री जी ने दर्जनो बार इसी के लिए दिल्ली की उड़ान भरी। सारे मंत्री दिल्ली गए और हाईकमान से विचार-विमर्श किया। अगर विनय कुमार को ही बनाना था फिर इतनी देर करने का न कारण समझ आ रहा है और न ही औचित्य। खैर अब विनय कुमार विधानसभा के उपाध्यक्ष के पद से त्यागपत्र देकर कांग्रेस अध्यक्ष का पद संभाल चुके है। अब उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती प्रदेश मे कांग्रेस संगठन बनाने और उसे सक्रिय करने की है।
याद रहे जब कांग्रेस ने हिमाचल के संगठन को भंग किया था तो एक कारण यह भी बताया गया था कि संगठन निष्क्रिय है। अब संगठन की गैर हाजरी मे लगभग कांग्रेस के सभी कार्यकर्ता निष्क्रिय ही नही अपितु निष्प्राण हो चुके है। विनय कुमार जी को उनमे और नये संगठन मे प्राण फूंकने होगें। संगठन बनाने के बाद और उसे सक्रिय करने के बाद भी नये कांग्रेस अध्यक्ष को कई गंभीर चुनौतियों का सामना करना होगा। मेरे ब्लॉग की समय और स्थान को लेकर अपनी सीमा है इसलिए उन चुनौतियों की चर्चा कल की कड़ी मे करेंगे।
महेंद्र नाथ सोफ़त एक भारतीय राजनीतिज्ञ और भारतीय जनता पार्टी के सदस्य हैं। सोफत सोलन जिले के सोलन निर्वाचन क्षेत्र से हिमाचल प्रदेश विधान सभा के सदस्य थे।