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चातुर्मास

परिवर्तिनी एकादशी 2026: 22 सितंबर को रखा जाएगा व्रत, जानें तिथि, पूजा-विधि, व्रत कथा और धार्मिक महत्व
एकादशी

परिवर्तिनी एकादशी 2026: 22 सितंबर को रखा जाएगा व्रत, जानें तिथि, पूजा-विधि, व्रत कथा और धार्मिक महत्व

 आज राहु काल कब तक रहेगा व क्या है शुभ मुहूर्त आईये जानते हैं 26 जुलाई 2026 का पंचांग
आज का पंचांग

आज राहु काल कब तक रहेगा व क्या है शुभ मुहूर्त आईये जानते हैं 26 जुलाई 2026 का पंचांग

26 जुलाई 2026, रविवार का दिन धार्मिक दृष्टि से अत्यंत शुभ माना गया है। आज आषाढ़ शुक्ल द्वादशी तिथि है और देवशयनी एकादशी व्रत का पारण किया जाएगा। भगवान श्रीहरि विष्णु की आराधना, दान-पुण्य और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए यह दिन विशेष फलदायी माना जाता है।

देवशयनी एकादशी पर लक्ष्मी नारायण मंदिर बोहण में उमड़ी श्रद्धालुओं की आस्था, चातुर्मास के शुभारंभ पर गूंजे श्रीहरि के भजन
ज्वालामुखी

देवशयनी एकादशी पर लक्ष्मी नारायण मंदिर बोहण में उमड़ी श्रद्धालुओं की आस्था, चातुर्मास के शुभारंभ पर गूंजे श्रीहरि के भजन

मंदिर के पुजारियों ने बताया कि देवशयनी एकादशी से भगवान श्री विष्णु क्षीरसागर में शेषनाग की शैया पर योगनिद्रा में विराजमान होते हैं और इसी दिन से चातुर्मास का शुभारंभ होता है। यह चार माह का कालखंड देवउठनी एकादशी तक चलता है और सनातन धर्म में इसे साधना, संयम और आध्यात्मिक उन्नति का श्रेष्ठ समय माना जाता है।

 आज राहु काल कब तक रहेगा व क्या है शुभ मुहूर्त आईये जानते हैं 25 जुलाई 2026 का पंचांग
आज का पंचांग

आज राहु काल कब तक रहेगा व क्या है शुभ मुहूर्त आईये जानते हैं 25 जुलाई 2026 का पंचांग

भारतीय ज्योतिष शास्त्र में पंचांग का अपना महत्व है। पंचांग के अनुसार ही हम अपने धार्मिक क्रियाकलाप करते हैं। शुभ अशुभ का ज्ञान हमें प्राप्त होता है। आइये जानते हैं, आज के पंचांग के अनुसार कब है शुभ मुहूर्त और कब तक है राहुकाल और क्या है ग्रह चाल।  

25 जुलाई 2026 का राशिफल
राशिफल

25 जुलाई 2026 का राशिफल

देवशयनी एकादशी के पावन अवसर पर भगवान विष्णु योगनिद्रा में प्रवेश करेंगे और चातुर्मास का शुभारंभ होगा। ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति आज कई राशियों के लिए नई संभावनाएं लेकर आई है। आइए जानते हैं सभी 12 राशियों का दैनिक राशिफल।

चातुर्मास का शुभारंभ 25 जुलाई से, देवशयनी एकादशी पर भगवान विष्णु जाएंगे योगनिद्रा में
देवशयनी एकादशी

चातुर्मास का शुभारंभ 25 जुलाई से, देवशयनी एकादशी पर भगवान विष्णु जाएंगे योगनिद्रा में

मान्यता है कि देवशयनी एकादशी का श्रद्धापूर्वक व्रत करने से भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विशेष कृपा प्राप्त होती है। इस दिन तुलसी पूजन, पीले पुष्प अर्पित करना, घी का दीपक जलाना, श्री विष्णु सहस्रनाम का पाठ तथा जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र और दक्षिणा का दान करना अत्यंत पुण्यदायी माना गया है।

 हर साल कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि को तुलसी विवाह मनाया जाता है
पर्व

हर साल कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि को तुलसी विवाह मनाया जाता है

तुलसी विवाह का महत्व तुलसी विवाह को देवी-देवताओं का विवाह कहा गया है. यह न केवल धार्मिक दृष्टि से बल्कि सामाजिक और आध्यात्मिक रूप से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है. शास्त्रों में वर्णन है कि जो व्यक्ति श्रद्धा और भक्ति से तुलसी विवाह संपन्न करता है, उसे भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी का आशीर्वाद प्राप्त होता है. घर में सुख, शांति और समृद्धि बनी रहती है. तुलसी विवाह को कन्यादान के समान पुण्य फलदायी माना गया है

आज राहु काल कब तक रहेगा व क्या है शुभ मुहूर्त आईये जानते हैं 06 जुलाई का पंचांग
आज का पंचांग

आज राहु काल कब तक रहेगा व क्या है शुभ मुहूर्त आईये जानते हैं 06 जुलाई का पंचांग

अपने दैनिक पंचांग को रोजाना देखें और किसी भी नए काम को शुरू करने के लिए इसका पालन करें जैसे कि वैवाहिक समारोह, सामाजिक मामलों, महत्वपूर्ण कार्यक्रमों, उद्घाटन, नए व्यापार उपक्रम आदि जैसे शुभ कार्यक्रम इसके अनुसार करें।

देवशयनी एकादशी 6 जुलाई  को मनाई जाएगी , इस दिन भगवान विष्णु चार महीने के शयनकाल पर चले जाते हैं
जुलाई

देवशयनी एकादशी 6 जुलाई को मनाई जाएगी , इस दिन भगवान विष्णु चार महीने के शयनकाल पर चले जाते हैं

देवशयनी एकादशी आषाढ़ शुक्ल एकादशी को मनाई जाती है। इस बार देवशयनी एकादशी 6 जुलाई दिन रविवार को मनाई जाएगी। देवशयनी एकादशी को लेकर मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु चार महीने के शयनकाल पर चले जाते हैं। इस एकादशी को हरिशयनी एकादशी या पद्मा एकादशी भी कहते हैं। इसी दिन चातुर्मास भी शुरू होता है। मान्यता है कि देवशयनी एकादशी का व्रत करने से सभी पापों से मुक्ति मिलती है।

चातुर्मास का आरंभ 29 जून को देवशयनी एकादशी के दिन से
चातुर्मास

चातुर्मास का आरंभ 29 जून को देवशयनी एकादशी के दिन से

आषाढ़ मास 5 जून से लग रहा है और इस मास के शुक्‍ल पक्ष की एकादशी यानी कि देवशयनी एकादशी के दिन से भगवान विष्‍णु श्रीर सागर में 5 महीने की योग निद्रा में चले जाते हैं। उसके बाद कार्तिक मास के शुक्‍ल पक्ष की एकादशी यानी कि देवउठनी एकादशी के दिन योग निद्रा से जाग जाते हैं। इस 5 महीने की अवधि में कोई भी शुभ मांगलिक कार्य जैसे विवाह, मुंडन आदि नहीं किए जाते हैं। 23 नवंबर को देवउठनी एकादशी पर चातुर्मास का समापन होगा।

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