ज्वालामुखी, 25 जुलाई। देवशयनी एकादशी एवं चातुर्मास के शुभारंभ के पावन अवसर पर लक्ष्मी नारायण मंदिर, बोहण (ज्वालामुखी) में शनिवार को श्रद्धा और भक्ति का अनुपम संगम देखने को मिला। सुबह से ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगी रहीं। श्रद्धालुओं ने भगवान श्री लक्ष्मी नारायण के दर्शन कर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की तथा परिवार की सुख-समृद्धि, प्रदेश की खुशहाली और विश्व शांति की कामना की।
इस अवसर पर मंदिर में भव्य भजन-कीर्तन का आयोजन किया गया, जिसमें महिला एवं पुरुष श्रद्धालुओं ने पूरे उत्साह के साथ भाग लिया। श्रीहरि के भजनों और जयघोषों से पूरा मंदिर परिसर भक्तिमय हो उठा। श्रद्धालु भक्ति रस में डूबकर भगवान विष्णु के गुणगान में लीन रहे और पूरे वातावरण में आध्यात्मिक उल्लास का अद्भुत दृश्य देखने को मिला।
धार्मिक आयोजन के दौरान श्रद्धालुओं ने सामूहिक रूप से विष्णु सहस्रनाम का पाठ भी किया। सनातन परंपरा में देवशयनी एकादशी पर विष्णु सहस्रनाम का पाठ अत्यंत फलदायी माना गया है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और विश्वास के साथ भगवान विष्णु की आराधना करने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं तथा सुख, शांति और समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
चातुर्मास का विशेष महत्व
मंदिर के पुजारियों ने बताया कि देवशयनी एकादशी से भगवान श्री विष्णु क्षीरसागर में शेषनाग की शैया पर योगनिद्रा में विराजमान होते हैं और इसी दिन से चातुर्मास का शुभारंभ होता है। यह चार माह का कालखंड देवउठनी एकादशी तक चलता है और सनातन धर्म में इसे साधना, संयम और आध्यात्मिक उन्नति का श्रेष्ठ समय माना जाता है।
चातुर्मास के दौरान जप, तप, व्रत, दान, कथा-श्रवण, सत्संग, सेवा और भजन-कीर्तन का विशेष महत्व बताया गया है। संत-महात्मा भी इस अवधि में एक स्थान पर रहकर धर्मोपदेश और साधना करते हैं। धार्मिक मान्यता है कि इन चार महीनों में श्रद्धापूर्वक किए गए पुण्य कार्यों का कई गुना फल प्राप्त होता है तथा भगवान श्रीहरि की कृपा से जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आते हैं।
कार्यक्रम के अंत में मंदिर में प्रसाद वितरित किया गया। श्रद्धालुओं ने भगवान श्री लक्ष्मी नारायण के चरणों में शीश नवाकर देश, प्रदेश और समाज के सुख, शांति, समृद्धि एवं जनकल्याण की प्रार्थना की। देवशयनी एकादशी और चातुर्मास के शुभारंभ पर आयोजित इस धार्मिक आयोजन ने पूरे मंदिर परिसर को भक्ति और श्रद्धा के रंग में रंग दिया।