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धर्मशाला: 8वें ऑल इंडिया तिब्बत सपोर्ट ग्रुप्स सम्मेलन को सिक्योंग पेनपा त्सेरिंग ने किया संबोधित
धर्मशाला

धर्मशाला: 8वें ऑल इंडिया तिब्बत सपोर्ट ग्रुप्स सम्मेलन को सिक्योंग पेनपा त्सेरिंग ने किया संबोधित

अपने संबोधन में सिक्योंग पेनपा त्सेरिंग ने कहा कि तिब्बती नेतृत्व की दो प्रमुख जिम्मेदारियां हैं—सिनो-तिब्बत संघर्ष का समाधान और निर्वासन में रह रहे तिब्बतियों का कल्याण सुनिश्चित करना। उन्होंने बताया कि भारत में तिब्बती समुदाय 37 से अधिक स्थानों पर बसा हुआ है, जिनमें सबसे अधिक बस्तियां कर्नाटक में हैं, जबकि नेपाल में भी कई तिब्बती समुदाय रहते हैं।

Tibetan Institute of Performing Arts में आयोजित दो दिवसीय 8वां ऑल इंडिया तिब्बत सपोर्ट ग्रुप्स कॉन्फ्रेंस का समापन
धर्मशाला

Tibetan Institute of Performing Arts में आयोजित दो दिवसीय 8वां ऑल इंडिया तिब्बत सपोर्ट ग्रुप्स कॉन्फ्रेंस का समापन

सम्मेलन के अंतिम दिन प्रतिभागियों ने सर्वसम्मति से एक घोषणा-पत्र पारित किया, जिसमें नौ महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित कर तिब्बती लोगों के साथ एकजुटता व्यक्त की गई और तिब्बत आंदोलन को मजबूत करने के लिए जागरूकता अभियान, युवाओं की भागीदारी और राष्ट्रीय स्तर पर समन्वित प्रयासों पर जोर दिया गया।

किन्नौर की संस्कृति, बोली व साहित्य को बचाने का करें साझा प्रयास: अनुराग सिंह ठाकुर
शिमला

किन्नौर की संस्कृति, बोली व साहित्य को बचाने का करें साझा प्रयास: अनुराग सिंह ठाकुर

पहाड़ी राज्यों के सीमावर्ती गावों में यह विषमता तो और भी अधिक विकराल रही है ।हमने उस मानसिकता को बदला है ।आप भारत के अंतिम गाँव नहीं भारत के पहले गाँव हैं । भारत का अंत आपके गाँवों में नहीं होता है भारत का आरंभ आपके गाँव से होता है । विकास की पहली किरण, विकास का पहला पैसा आपके लिए है ।2021 में जब किन्नौर में प्राकृतिक हादसा हुआ था तो केंद्र सरकार ने सबसे पहले respond किया था

 हिमाचल प्रदेश में चार साल के नवांग ताशी बने Buddhist धर्मगुरू
धर्मगुरू

हिमाचल प्रदेश में चार साल के नवांग ताशी बने Buddhist धर्मगुरू

ताबो इलाके के रंगरिक गांव के इस शिशु की पहचान तिब्बती बौद्ध धर्म की नियंगमा शाखा के प्रमुख तकलुंग चेतुल रिनपोछे के चौथे पुनर अवतार के रूप में की गई है। नियंगमा शाखा का यह मठ छह उच्च मठों में से एक है। कई देशों से आए बौद्ध अनुयायियों ने इस समारोह में हिस्सा लिया। शिशु के दादा छेतन अंगचुक ने अपने शिशु को मठ को दे कर खुशी जाहिर की है।  

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