विक्रम बत्रा के बचपन से लेकर कारगिल के रणक्षेत्र और उनकी शहादत के बाद बनी उस अमर विरासत तक, जो आज भी नई पीढ़ी को प्रेरित करती है। कैप्टन विक्रम बत्रा ने 7 जुलाई 1999 को कारगिल की धरती पर देश के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया। उनकी उम्र उस समय महज 24 वर्ष थी। एक युवा अधिकारी का जीवन भले ही युद्धभूमि में थम गया, लेकिन उनकी कहानी वहीं समाप्त नहीं हुई।